हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है। अधिकतर लोग किसी शुभ काम को शुरू करने से पहले संकल्प करते हैं और गणेश जी को याद करते हैं. कुछ लोग काम का शुभारंभ करते समय सर्वप्रथम श्रीगणेशाय नम: लिखते हैं इसके अलावा यह रिवाज भी है कि सभी देवी-देवताओं से पहले श्री गणेश की पूजा की जाती है. गणेश जी को प्रथम पूज्य इसलिए माना गया है क्योंकि, भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है. गणेश जी की पूजा करने से कोई भी काम बिना विघ्न के पूरा होता है. गणेश जी को बुद्धि, ज्ञान और विवेक का प्रतीक माना जाता है. उनकी पूजा से कार्य शुरू करने से हर कार्य बिना बाधाओं के संपन्न होता है.
बहुत कम लोग जानते हैं कि सबसे पहले गणेशजी की ही पूजा क्यों की जाती है. तो आइए आपको बताते हैं क्यों की जाती है गणेश जी की सबसे पहले पूजा..दरअसल, किसी पूजा, आराधना, अनुष्ठान के कार्य में कोई विघ्न-बाधा न आए, इसलिए सर्वप्रथम गणेश-पूजा करके उसकी कृपा प्राप्त की जाती है. इसके पीछे पौराणिक कथा है एक बार समस्त देवताओं में इस बात पर विवाद उत्पन्न हुआ कि धरती पर किस देवता की पूजा सभी देवगणों से सबसे पहले होना चाहिए। सभी देवता स्वयं को ही सर्वश्रेष्ठ बताने लगें स्थिति को देख कर तब नारद जी ने सभी देवगणों को भगवान शिव की शरण में जाने व उनसे इस प्रश्न का उत्तर बताने की सलाह दी.

सबसे पहले गणेश जी की पूजा क्यों होती है?
जब सभी देवता भगवान भोलेनाथ के समीप पहुंचे तो उनके बीच इस झगड़े को देखते हुए भगवान शिव ने इसे सुलझाने की एक योजना सोची. उन्होंने एक प्रतियोगिता आयोजित की. सभी देवगणों को कहा गया कि वे सभी अपने-अपने वाहनों पर बैठकर इस पूरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाकर आएं. इस प्रतियोगिता में जो भी सर्वप्रथम ब्रह्माण्ड की परिक्रमा कर उनके पास पहुंचेगा, वही सर्वप्रथम पूजनीय माना जाएगा. सभी देवता अपने-अपने वाहनों को लेकर परिक्रमा के लिए निकल पड़े. गणेश जी भी इसी प्रतियोगिता का हिस्सा थे. लेकिन, गणेश जी बाकी देवताओं की तरह ब्रह्माण्ड के चक्कर लगाने की जगह अपने माता-पिता शिव-पार्वती की सात परिक्रमा पूर्ण कर उनके सम्मुख हाथ जोड़कर खड़े हो गए. जब समस्त देवता अपनी अपनी परिक्रमा करके लौटे तब भगवान शिव ने श्री गणेश को प्रतियोगिता का विजयी घोषित कर दिया. सभी देवता यह निर्णय सुनकर अचंभित हो गए और शिव भगवान से इसका कारण पूछने लगे । तब शिवजी ने उन्हें बताया कि माता-पिता को समस्त ब्रह्माण्ड एवं समस्त लोक में सर्वोच्च स्थान दिया गया है, जो देवताओं व समस्त सृष्टि से भी उच्च माने गए हैं. तब सभी देवता, भगवान शिव के इस निर्णय से सहमत हुए. तभी से गणेश जी को सर्वप्रथम पूज्य माना जाने लगा.
शिव महापुराण की कथा- भगवान शिव ने दिया प्रथम पूजा का वरदान
शिव महापुराण की कथा के अनुसार जब भगवान शिव और गणेशजी के बीच युद्ध हुआ और गणेशजी का सिर कट गया तो देवी पार्वती के कहने पर शिवजी ने गणेश जी के शरीर पर हाथी का सिर जोड़ दिया। जब देवी पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि इस रूप में मेरे पुत्र की पूजा कौन करेगा। तब शिवजी ने वरदान दिया कि सभी देवी-देवताओं की पूजा और हर मांगलिक काम से पहले गणेश की पूजा की जाएगी। इनके बिना हर पूजा और काम अधूरा माना जाएगा।
शास्त्रों में इन दोनो कथा का वर्णन है जिसके अनुसार भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले की जाती है।
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