“करवा चौथ पर करवा, छन्नी और दीपक? जानें इनका धार्मिक महत्व”

करवा चौथ हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं द्वारा रखा जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत है, ये व्रत पति की लंबी उम्र के लिए और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है कई पति भी अपनी पत्नी के लिए इस व्रत को रखते है। करवा चौथ में पूजन सामग्री के रूप में छन्नी, करवा और दीपक का खासतौर से इस्तेमाल होता है. लेकिन क्या आपको पता है कि पति-पत्नी के आपसी समर्पण से जुड़े करवा चौथ पर कुछ नियम के साथ पूजन सामग्री भी महत्वपूर्ण होते है आइये जानते है कौन कौन सी सामग्री की जरुरत इस व्रत में रहती है कुछ खास सामग्रीयों की बात आज करते है

 

मिट्टी का करवा क्यों है खास?

 

शास्त्रों के अनुसार, मिट्टी का करवा पंच तत्व का प्रतीक माना गया है, मिट्टी को पानी में गलाकर करवा बनाते हैं. जो भूमि तत्व और जल तत्व का प्रतीक है. फिर उसे धूप और हवा में सुखाया जाता है, जो आकाश तत्व और वायु तत्व के प्रतीक हैं. फिर आग में तपाकर करवा तैयार किया जाता है. चूंकि भारतीय संस्कृति में पानी परब्रह्म माना गया है और जल ही सब जीवों की उत्पत्ति का केंद्र है, ऐसे में मिट्टी के करवे से पानी पिलाकर पति-पत्नी अपने रिश्ते में पंचतत्व और परमात्मा दोनों को साक्षी बनाकर अपने दाम्पत्य जीवन को सुखी बनाने की कामना करते हैं.

 

करवाचौथ पर छन्नी का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, करवा चौथ को लेकर मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणें सीधे नहीं देखी जाती हैं. उसके बीच किसी पात्र या छन्नी के जरिए देखने की परंपरा है. क्योंकि चंद्रमा की किरणें अपनी कलाओं में विशेष प्रभावी रहती हैं, जो लोक परंपरा में चंद्रमा के साथ पति-पत्नी के संबंध को खुशियों से भर देती हैं. चंद्र दर्शन के बाद तुरंत उसी छन्नी से पति का मुख देखा जाता है. इसलिए महिलाएं बाजारों से सुंदर छन्नीयों को खरीदती है

 

करवा चौथ में दीपक का महत्व

 

व्रत के पूजा के दौरान पति को छन्नी से देखने की परंपरा है इसके साथ ही दीये की रोशनी का करवा चौथ में विशेष महत्व है. शास्त्रों के अनुसार, धरती पर सूर्य का बदला रूप अग्नि माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि अग्नि को साक्षी मानकर की गई पूजा सफल होती है. वहीं प्रकाश या रोशनी ज्ञान का प्रतीक भी कहे जाते हैं. ज्ञान मिलने से अज्ञानता दूर होती है. ऐसे मे.. रोशनी का प्रतीक दीया भी नकारात्मक ऊर्जा दूर भगाता है. इसलिए करवा चौथ पर दीपक के प्रयोग को शुभ माना गया है.माना जाता है चंद्रमा की पूजा के समय आटे का दीपक को छलनी में रखकर चांद और पति को छलनी से देखने की परंपरा है ।