अनंत चतुर्दशी: भगवान विष्णु और गणपति की कृपा पाने का शुभ दिन

भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्दशी तिथि को आने वाली अनंत चतुर्दशी का हिंदू धर्म में बेहद खास महत्व है। अनंत चतुर्दशी के दिन गणेशोत्सव का समापन होता है. गणेश चतुर्थी के दिन स्थापित की गई भगवान गणेश की मूर्तियों का इस दिन विसर्जन किया जाता है. भक्तगण ढोल-नगाड़ों, भक्ति भजनों और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष के साथ गणेश जी को विदा करते हैं. इस विश्वास के साथ कि वे अगले वर्ष फिर आएंगे. इस तरह यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और भगवान गणेश की विदाई दोनों का संगम है, जो इसे और भी विशेष बनाता है. अनंत चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाएगा और इस बार यह शुभ तिथि 6 सितंबर यानी आज है. आज भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और गणेशोत्सव के समापन का अनूठा संगम है.हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के साथ-साथ जीवन के कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है.  अनंत चतुर्दशी का यह पर्व भक्ति और आस्था का अनूठा मेल है, जो भगवान विष्णु की कृपा और गणेश जी की विदाई के साथ जीवन में नई ऊर्जा और समृद्धि लाता है.

अनंत चतुर्दशी का महत्व-
अनंत चतुर्दशी का पर्व धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. इस दिन भगवान विष्णु और गणेश जी दोनों की पूजा की जाती है. इस दिन व्रत करने से पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की वृद्धि होती है और घर में सुख-समृद्धि, शांति और संतान की उन्नति होती है. गणेश विसर्जन भी इसी दिन होता है, जिससे विघ्नों का नाश और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है.अनंत चतुर्दशी का महत्व इसलिए और भी ज्यादा बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन 14 गांठ वाला सूत्र बाधां जाता है,इस 14 गांठ वाला सूत्र को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है, इसे बांधने से जीवन में अनंत सुख और समृद्धि आती है. साथ ही यह धागा जीवन में संकटों से रक्षा करता है ये गांठें भगवान विष्णु के 14 लोकों-भुवन, भुवर, स्व, मह, जन, तप, सत्य, अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल का प्रतीक हैं. 

अनंत चतुर्दशी पूजा विधि-
 ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान ध्यान से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर गंगाजल से छिड़काव करें और विष्णुजी का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें. फिर विष्णुजी का पंचामृत स्नान, वस्त्र, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें. भोग में मीठे व्यंजन विशेषकर पूड़ी और मीठी पकवान चढ़ाएं. इसके बाद कच्चे धागे को हल्दी, केसर से रंगकर उसमें 14 गांठ लगाएं, इसे भगवान के समक्ष रखकर पूजन करें.अनंत सूत्र की पूजन करने के बाद ॐ अनंताय नमः मंत्र का भी जप करें. पुरुष दाहिने हाथ में तो महिलाएं बाएं हाथ में सूत्र बांधें. इसके बाद अनंत चतुर्दशी व्रत कथा सुनें. आरती करें और प्रसाद सभी में बांट दें. पूरे दिन फलहार रहें और अगले दिन व्रत का पारण भी करें. इस तरह हम भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना करके उनकी कृपा पा सकते है, रिपोर्ट न्यूज पीडिया24