चंडीगढ़, 27 अप्रैल- हरियाणा विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के उपरांत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा प्रहार किया और सत्र की कार्यवाही को पूरी तरह संवैधानिक एवं जनहित में बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष द्वारा यह आरोप लगाया गया कि विशेष सत्र असंवैधानिक है, जो पूरी तरह निराधार है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सत्र कैबिनेट की मंजूरी और राज्यपाल की अनुमति से विधिवत रूप से बुलाया गया था। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या चुनी हुई सरकार, कैबिनेट और राज्यपाल के निर्णय को असंवैधानिक कहा जा सकता है।
आचार संहिता लागू होने के बावजूद विशेष सत्र बुलाए जाने पर उठे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूर्णतः विधायी विषय है और इसमें कुछ भी असंवैधानिक नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लोकसभा का भी विशेष सत्र बुलाया गया था, इसलिए इस पर आपत्ति करना निराधार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष प्रदेश में खरीद संबंधी समस्याओं पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया, जिसे हमने स्वीकार किया। लेकिन, विपक्ष सदन में ही नहीं आया। इसके अतिरिक्त, नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर एक सरकारी प्रस्ताव भी लाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव में ‘निंदा’ जैसे शब्द का कोई उल्लेख नहीं था, इसके बावजूद विपक्ष ने हताशा और तिरस्कार का परिचय देते हुए सदन का बहिष्कार किया।
कांग्रेस पर निशाना साधा
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी के विधायक सदन में उपस्थित नहीं हुए और उन्होंने सदन के बाहर डुपलीकेट सेशन चलाया, जो नियमों के विरुद्ध और पूरी तरह असंवैधानिक है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अनादर का आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि आज महिलाएं विकास की मुख्यधारा में बराबरी से भागीदारी निभा रही हैं। बेटियां शिक्षा, खेल, प्रशासन, वकालत और पायलट जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। इसके विपरीत, कांग्रेस का रवैया महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति सकारात्मक नहीं दिखाई देता। उन्होंने प्रधानमंत्री के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज की आधी आबादी को उनका हक दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।


