अमावस्या तिथि आज शाम 5 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी और उसके ठीक बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत हो जाएगी.
तो ऐसे में पंचांग के मुताबिक, अमावस्या तिथि के कारण गोवर्धन पूजा 21 अक्टूबर को न करके 22 अक्टूबर को ही जाएगी.
हालांकि, हर वर्ष गोवर्धन पूजा दीवाली के अगले दिन की जाती है यानी दीपावली के पंच पर्व में यह त्योहार चौथे दिन मनाया जाता है
इस बार इस त्योहार की तिथि 21 अक्टूबर यानी आज शाम 5 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी
और तिथि का समापन 22 अक्टूबर की रात 8 बजकर 16 मिनट पर होगा.
हर कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा की जाती है।
इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर देवताओं के राजा इंद के अभिमान को दूर किया था।
तभी से गोवर्धन पूजा की जानें लगी। इस दिन गोवर्धन पूजा के साथ उनकी परिक्रमा का भी बहुत महत्व है।
गोवर्धन पूजा का पहला मुहूर्त
गोवर्धन पूजा का पहला मुहूर्त 22 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 26 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 42 मिनट तक रहेगा.
दूसरा मुहूर्त
दूसरा मुहूर्त दोपहर 3 बजकर 29 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।
पूजन का तीसरा मुहूर्त
पूजन का तीसरा मुहूर्त गोधूली वेला में बनेगा, जो कि शाम 5 बजकर 44 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. यानी इन तीनों मुहूर्त में आप गोवर्धन पूजा कर सकते है।
गोवर्धन पूजा कैसे करें?
इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर और आंगन की सफाई करें. फिर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाएं. इसमें छोटे-छोटे टीले बनाकर गाय, बछड़े, पेड़-पौधे और तालाब जैसी आकृतियां बनाई जाती हैं, जो प्रकृति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं । इसके बाद पूजा स्थल को तैयार करें और दीपक जलाकर भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करें. पूजन के लिए फूल, जल, अक्षत, मिठाई, तुलसी पत्र, दूध, दही, घी, गुड़, और अन्न जैसी वस्तुएं रखें. श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत का विधिवत पूजन करें.

इसके बाद भगवान को अन्नकूट का भोग लगाएं, यानी तरह-तरह के व्यंजन जैसे पूड़ी, सब्जी, मिठाई, चावल और खीर इत्यादि बनाकर अर्पित करें. ऐसा माना जाता है कि जितना अधिक अन्न भगवान को अर्पित किया जाता है, घर में उतनी ही अधिक समृद्धि आती है. पूजन के बाद गोवर्धन पर्वत के चारों ओर सात बार परिक्रमा करें और श्री कृष्ण की आरती करें. आरती के बाद प्रसाद बांटें और घर के सभी सदस्यों के साथ आनंदपूर्वक पर्व मनाएं. इस दिन गायों की पूजा और सेवा करना बहुत शुभ माना जाता है।
गायों की पूजा की परंपरा
इस दिन गायों की सेवा की भी परंपरा है। कुछ स्थानों पर गोवर्धन पूजा के साथ ही गायों को स्नान कराने की उन्हें सिंदूर इत्यादि पुष्प मालाओं से सजाए जाने की परम्परा भी है इस दिन गाय का पूजन भी किया जाता है तो यदि आप गाय को स्नान करा कर उसे सजा सकते हैं या उसका श्रृंगार कर सकते हैं तो कोशिश करिए कि गाय का श्रृंगार करें और उसके सिंह पर घी लगाए गुड खिलाएं. गाय की पूजा के बाद में एक मंत्र का उच्चारण किया जाता है जिससे लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं और आपके घर में कभी धन की कमी नहीं रहती है.



