उत्तर प्रदेश सरकार की योगी सरकार ने महिलाओँ के लिए बड़ा फैसला लिया है सरकार ने महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उन्हें अब रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति दे दी है। उत्तर प्रदेश की करोड़ों कामकाजी महिलाओं के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. योगी सरकार का ये फैसला महिलाओं के रोजगार को भी मजबूत करेगा और उनके लिए रोजगार के नए दरवाजे भी खोलेगा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जारी इस नए आदेश ने न केवल महिलाओं को नई आजादी दी है बल्कि उन्हें सुरक्षा और आर्थिक रूप से मजबूती भी प्रदान की है।
बतादें अब महिलाएं रात 7 बजे से सुबह 6 बजे तक काम कर सकेंगी और इसके लिए उन्हें मिलेगा दोगुना वेतन, साथ ही CCTV निगरानी, ट्रांसपोर्ट, हेल्थ और सिक्योरिटी की सुविधाएं भी अनिवार्य होंगी। राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर बताया कि यह आदेश सभी उद्योगों पर लागू होगा, यहां तक कि खतरनाक कैटेगरी में आने वाले सेक्टरों में भी अब महिलाएं काम कर सकेंगी। इससे पहले महिलाएं केवल 12 प्रकार के औद्योगिक वर्गों में ही कार्यरत हो सकती थीं, लेकिन अब यह संख्या बढ़ाकर 29 सेक्टरों तक कर दी गई है।
महिलाओं की सुरक्षा के सख्त इंतजाम
महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह भी बताया कि 1090 वीमेन पावर लाइन, 112 हेल्पलाइन, एंटी-रोमियो स्क्वॉड्स और सेफ सिटी प्रोजेक्ट जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है
ओवरटाइम पर मिलेगा दोगुना वेतन
नए नियमों के तहत महिलाओं को सप्ताह में 6 दिन तक काम करने की अनुमति होगी, जबकि ओवरटाइम सीमा बढ़ाकर 75 घंटे से 144 घंटे प्रति तिमाही कर दी गई है। सबसे बड़ी राहत यह है कि ओवरटाइम के लिए महिलाओं को दोगुना वेतन दिया जाएगा। यह आदेश राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद उत्तर प्रदेश फैक्ट्री (संशोधन) अधिनियम के अंतर्गत लागू किया गया है।
नाइट शिफ्ट अब विकल्प, मजबूरी नहीं
सीएम योगी ने बताया महिलाएं इसके लिए मजबूर नही है अगर वो नाइट शिफ्ट करना चाहती है तो ही वो करेगी कोई जबरजस्ती नही होगी उनके साथ शिफ्ट को लेकर। श्रम विभाग द्वारा जारी गजट अधिसूचना में साफ कहा गया है कि किसी भी महिला कर्मचारी पर रात की शिफ्ट थोपी नहीं जा सकती। यदि कोई महिला नाइट शिफ्ट से इनकार करती है तो उससे वेतन कटौती, छंटनी या किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकती।
जो महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम करना चाहेंगी, उन्हें लिखित सहमति देनी होगी, जिसे श्रम विभाग में पंजीकृत किया जाएगा ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
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