विश्व एकता और स्वास्थ्य का प्रतीक बना अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025, पीएम मोदी ने लाखों लोगों के साथ किया योगाभ्यास!

चंडीगढ़, 21 जून: आज का दिन दुनिया भर में स्वास्थ्य, मानसिक शांति और प्रकृति से जुड़ाव के प्रतीक के रूप में मनाया गया, जब अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के 11वें संस्करण का आयोजन पूरी भव्यता और जनभागीदारी के साथ किया गया। इस वर्ष का आयोजन न केवल भारत के लिए, बल्कि वैश्विक समुदाय के लिए भी विशेष रहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के प्रमुख शहर विशाखापट्टनम में आयोजित भव्य केंद्रीय कार्यक्रम में भाग लिया और समुद्र किनारे लगभग 5 लाख से अधिक लोगों के साथ एक साथ योग किया। सुबह 6:30 बजे से 7:45 बजे तक चले इस आयोजन में उन्होंने ‘कॉमन योगा प्रोटोकॉल’ के तहत विभिन्न योगासन किए और जनसमूह को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया।

इस विशाल योग सभा को “योग संगम” नाम दिया गया — जहां योग, प्रकृति और जनभागीदारी का मिलन हुआ। कार्यक्रम स्थल पर प्रधानमंत्री के साथ आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भी योग करते हुए नजर आए। दोनों नेताओं की उपस्थिति ने लोगों को योग के प्रति और अधिक प्रेरित किया।

 योग दिवस की वैश्विक गूंज: 180 देशों ने किया आयोजन

इस वर्ष योग दिवस का दायरा सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक वैश्विक आंदोलन में बदल चुका है। 180 से अधिक देशों में इस दिवस को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया गया। विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों में विशेष योग सत्र आयोजित किए गए, जिसमें वहां के नागरिकों और प्रवासी भारतीयों ने भाग लिया।

यह स्पष्ट संकेत है कि भारत की पहल पर शुरू हुई यह परंपरा अब विश्व शांति और स्वास्थ्य का साझा संकल्प बन चुकी है।

 थीम 2025: “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग”

इस बार योग दिवस की थीम रखी गई है — “Yoga for One Earth, One Health”, जिसका उद्देश्य यह है कि लोग समझें कि उनके व्यक्तिगत स्वास्थ्य और पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन के बीच गहरा संबंध है।

योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जीवनशैली है जो शरीर, मन और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करती है। इस थीम के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया है कि यदि हम स्वस्थ रहेंगे तो हमारी पृथ्वी भी स्वस्थ रहेगी।

 इतिहास की ओर एक नजर: योग दिवस की शुरुआत

आज जिस योग दिवस को पूरी दुनिया में व्यापक रूप से मनाया जा रहा है, उसकी नींव वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखे गए प्रस्ताव से पड़ी थी।

सिर्फ 90 दिनों के भीतर 177 देशों ने इसका समर्थन किया और 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी गई। इसके बाद पहला आयोजन 2015 में हुआ और तब से हर वर्ष यह दिन योग के महत्व को दर्शाता आ रहा है।

 देशभर में लाखों लोगों ने लिया भाग

भारत के विभिन्न राज्यों और शहरों में भी आज सुबह से ही योग सत्रों की बहार रही। लगभग 1 लाख से अधिक स्थलों पर सामूहिक योग अभ्यास आयोजित किए गए। इनमें छात्र, शिक्षक, सरकारी अधिकारी, सैनिक, पुलिसकर्मी, योग प्रशिक्षक, खिलाड़ी और आम नागरिकों ने उत्साह से भाग लिया।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी यमुना नदी के किनारे आयोजित विशेष योग सत्र में भाग लिया और नागरिकों को स्वच्छ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।

 सेना के साथ योग: उधमपुर में रक्षा मंत्री की उपस्थिति

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर के उधमपुर छावनी क्षेत्र में सैनिकों के साथ मिलकर योग किया। उन्होंने कहा कि योग सिर्फ आम नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि सैनिकों की फिटनेस और मानसिक दृढ़ता के लिए भी अनिवार्य है। उन्होंने जवानों से अपील की कि वे योग को अपनी रोज़मर्रा की दिनचर्या में शामिल करें।

 “योग संगम”: जब समंदर की लहरों के बीच हुआ आत्मशांति का उत्सव

विशाखापट्टनम के समुद्री तट पर स्थित खुले मैदान में आयोजित “योग संगम” वास्तव में एक ऐसा अनुभव था जो शब्दों से परे है। समुद्र की लहरों, सुबह की ठंडी हवा और हजारों लोगों के सामूहिक योगाभ्यास ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।

यह कार्यक्रम केवल योग का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, एकता और प्रकृति से जुड़ने के उत्सव का प्रतीक बन गया।