शिव को महाकाल क्यों कहा जाता है?..उनके चरणों में होती है अकाल मृत्यु से सुरक्षा

सोमवार का दिन भगवान शंकर के पूजा का दिन है । कहते है भगवान शंकर बड़े ही भोले है । उनके पूजा के लिए किसी विशेष सामान की जरुरत नही होती है । वे तो सिर्फ एक लोटे जल से ही खुश हो जाते है। भगवान शिव को बाबा भोले शंकर के नाम के साथ ही महाकाल भी कहा जाता है। कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से बाबा महाकाल की आराधना करता है, उसे कभी मृत्यु का भय नहीं डराता न ही कभी उसकी अकाल मृत्यु होती है।

इसलिए कहा जाता है क्योंकि भगवान शिव काल अर्थात समय एवं मृत्यु से परे हैं। भगवान शिव में तीनों काल समाए हैं- भूत, वर्तमान और भविष्य.. इन तीनों के बारे में महादेव जानते हैं।

इसिलिए महाकाल’ कहा जाता है

एक बार ऋषि मार्कंडेय के प्राण लेने मृत्यु के देवता यमराज आए। लेकिन ऋषि मार्कंडेय की रक्षा के लिए शिवलिंग में स्वयं भगवान शिव अपने त्रिशूल के साथ प्रकट हुए। यमराज ऋषि मार्कंडेय को अपने साथ न ले जा सके। मृत्यु (काल) तब तक किसी को नहीं छु सकती जब तक शिव जी की आज्ञा न हो। समय काल को भी शंकर जी नियंत्रित करते हैं। महादेव ही हैं जिनकी अनुमति के बिना यमराज किसी के प्राण नहीं ले सकते। ज्योतिषाचार्य के अनुसार महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करने से कभी अकाल मृत्यु नहीं होती। भगवान शिव काल के भी काल हैं इसलिए उन्हें ‘महाकाल’ कहा जाता है।

 

मंदिर में अकाल मृत्यु के निवारण के लिए बाबा महाकाल की विशेष पूजा की जाती है। मध्य प्रदेश के शहर उज्जैन का नाम तो हर किसी ने सुना होगा। अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए मशहूर यह शहर पूरी दुनिया में बाबा महाकाल के मंदिर के लिए प्रसिद्द है। प्राचीन नगरी उज्जैन में मौजूद महाकाल मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योर्तिलिंगों में से है। माना जाता है कालों के काल बाबा महाकाल के इस मंदिर के दर्शन करने हर साल लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं।