भगवान गणेश की पूजा सभी देवों में से सबसे पहले करने का विधान है माना जाता है इनकी पूजा से जीवन के सारे संकट दूर हो जाते है । वही संकष्टी गणेश चतुर्थी का महत्व हिंदू धर्म में बहुत अधिक है क्योंकि यह दिन विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव भगवान गणेश को समर्पित है जो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है। ‘संकष्टी’ शब्द का अर्थ है संकटों को हरने वाली, इसलिए इस दिन व्रत रखने और पूरी श्रद्धा से गणपति की पूजा करने से भक्तों के जीवन के सभी दुख, बाधाएं और संकट दूर हो जाते हैं। यह व्रत विशेष रूप से संतान की लंबी आयु और जीवन में बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है जिसमें रात को चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोलने का नियम है।
पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त
तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर 2025, सुबह 07:32 बजे
तिथि समाप्त: 9 नवंबर 2025, सुबह 04:25 बजे
8 या 9 नवंबर किस दिन होगी पूजा
मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 8 नवंबर, शनिवार सुबह 7 बजकर 32 मिनट पर होगा। वहीं, इसका समापन दूसरे दिन 9 नवंबर, रविवार के दिन सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर होगा।
इसी के साथ संकष्टी गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा का शुभ समय सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त में पूजा करने से जीवन के सारे संकट मिट जाते है और गणेश जी का आर्शिवाद मिलता है।
संकष्टी गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रोदय का समय
संकष्टी गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रोदय का समय शाम को लगभग 7 बजकर 59 मिनट पर रहेगा। ऐसे में चंद्रमा की पूजा का समय रात 8 बजकर 13 मिनट से रात 8 बजकर 58 मिनट तक है।

संतान के लिए की जाती है पूजा
यह पूजा विशेष रूप से संतान के लिए की जाती है जिससे संतान का कल्याण और मंगल होता है, माना जाता है कि इसे करने से संतान संबंधी सभी समस्याएं दूर होती हैं । इसके अलावा, इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को बुद्धि, ज्ञान, और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान गणेश विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता है। इस व्रत को करने से जीवन के सभी संकटों और बाधाओं से मुक्ती मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
गणेश पूजा विधि
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
- घर या मंदिर में गणेश जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं.
- गणपति बप्पा को लाल फूल, दूर्वा घास, मोदक और फल अर्पित करें.
- “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें.
- गणेश जी की आरती करें.
- दिनभर व्रत रखें और शाम को चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दें.
- चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद गणेश जी से मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करें.
- इसके बाद व्रत का पारण करें और प्रसाद ग्रहण करें.
संकष्टी चतुर्थी पर चांद निकलने का समय
इस दिन चांद का इंतजार रहता है क्योंकि चांद की पूजा के साथ ही यह व्रत पूरा होता है. गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने वालों को चांद निकलने का समय रहेगा चतुर्थी को शाम 07 बजकर 59 मिनट पर चांद निकलेगा. उस समय आप चंद्रमा की पूजा करें और अर्घ्य दें.
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