चंडीगढ़, 17 मई: दक्षिण एशिया के व्यापारिक रिश्तों में एक नई हलचल देखने को मिली है। भारत और अफगानिस्तान के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। लंबे समय से पाकिस्तानी सीमा पर फंसे 160 अफगानी ट्रकों को अब भारत में प्रवेश की अनुमति मिल गई है। ये ट्रक मुख्यतः सूखे मेवे जैसे बादाम, अखरोट और किशमिश लेकर आ रहे हैं, जो पहले से भारतीय व्यापारियों द्वारा खरीदे जा चुके थे।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब हाल ही में अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुत्ताकी और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच एक महत्वपूर्ण बातचीत हुई थी। इस बैठक के तुरंत बाद भारत ने यह कदम उठाकर अपने रिश्तों की गर्माहट और सहयोग की भावना को स्पष्ट कर दिया है।
आतंकवादी हमले के बाद अस्थायी रूप से बंद हुआ था बॉर्डर
गौर करने वाली बात है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने अटारी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। इस बंदी के कारण भारत और अफगानिस्तान के बीच चल रहा व्यापार रुक गया था, जिससे न सिर्फ व्यापारी बल्कि किसानों और श्रमिकों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
हालांकि, 16 मई को भारत ने पाँच ट्रकों को बॉर्डर पार करने की अनुमति देकर सप्लाई चैन की बहाली की शुरुआत की, और अब एक साथ 160 ट्रकों को एंट्री मिलना इस दिशा में एक बड़ा कदम है। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत-अफगान व्यापारिक संबंधों में नई जान फूंकने का दौर शुरू हो चुका है।
अफगान ट्रक भारत में दाखिल, व्यापारियों ने ली राहत की सांस
10 मई को भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव में थोड़ी नरमी आने के बाद, 8 अफगानी ट्रक भारत के अटारी बॉर्डर से दाखिल हुए। ये वही ट्रक थे जो अप्रैल के अंत से पाकिस्तान के लाहौर और वाघा सीमा पर अटके हुए थे। इन ट्रकों में मौजूद माल को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ती जा रही थी, क्योंकि समय पर इन्हें डिलीवर न करने पर यह खराब हो सकता था।
अब जबकि इन ट्रकों को भारत में प्रवेश मिल गया है, देशभर के सूखे मेवे के व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। यह फैसला न केवल व्यापार के लिए अहम है, बल्कि मानवता और पारस्परिक सहयोग की भावना को भी दर्शाता है।
पाकिस्तान ने पहले अटकाया रोड़ा, फिर दी अनुमति
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान ने शुरू में वाघा सीमा पर इन ट्रकों को क्लियरेंस देने में काफी देरी की। लेकिन बाद में आंशिक रूप से अनुमति दी गई, जिससे कई ट्रकों को भारत में माल उतारने का मौका मिला। यह बदलाव भारत के कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम है।
अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स होंगे फिर से शुरू, अफगानिस्तान में बढ़ेगी भारत की भागीदारी
भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अफगानिस्तान में अधूरे पड़े विकास प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करने की योजना पर काम कर रहा है। दुबई में अफगान विदेश मंत्री के साथ भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की बातचीत के बाद यह संभावना और मजबूत हो गई है।
भारत ने अफगान नागरिकों की शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी ज़रूरतों को भी प्राथमिकता दी है। इसके अंतर्गत:
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50,000 टन गेहूं
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350 टन जरूरी दवाएं
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40,000 लीटर मलेथियॉन (कीटनाशक)
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28 टन भूकंप राहत सामग्री
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2,000 स्कॉलरशिप अफगानी छात्रों के लिए
जैसी सहायता पहले ही अफगानिस्तान भेजी जा चुकी है।
तालिबान को मान्यता नहीं, लेकिन मानवीय सहयोग जारी
भारत सरकार ने यह दोहराया है कि वह तालिबान को तब तक औपचारिक मान्यता नहीं देगी जब तक वे महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा की स्वतंत्रता और समावेशी सरकार जैसी वैश्विक मांगों को पूरा नहीं करते। लेकिन भारत का मानवीय सहयोग, व्यापारिक सहयोग और विकास परियोजनाओं में भागीदारी बनी रहेगी।
अफगानिस्तान, वर्तमान परिस्थितियों में भी, भारत के लिए एक बड़ा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बना हुआ है, जिससे लगभग 1 बिलियन डॉलर का वार्षिक व्यापार होता है।
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