UP को मिलेगा पहला महिला DGP या फिर और बढ़ेगा ‘कार्यवाहक DGP’ का रिकॉर्ड?

चंडीगढ़, 31 मई: उत्तर प्रदेश की पुलिस व्यवस्था एक अहम मोड़ पर खड़ी है। राज्य के वर्तमान पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार आज यानी 31 मई 2025 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके रिटायरमेंट को लेकर जितनी गंभीरता है, उससे कहीं ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि आखिर उनके बाद यूपी पुलिस की कमान किसे सौंपी जाएगी

जहाँ एक ओर सेवा विस्तार की अटकलें अब भी पूरी तरह शांत नहीं हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ, संभावित उत्तराधिकारियों के नामों को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर पुलिस महकमे तक में सरगर्मी तेज़ हो गई है।

प्रशांत कुमार को मिलेगा सेवा विस्तार या होगा नया नाम तय?

पुलिस प्रमुख प्रशांत कुमार को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सीधा सवाल उठाया है। अपने एक ट्वीट में उन्होंने पूछा, “क्या प्रशांत कुमार को सेवा विस्तार मिलेगा?” यह सवाल कहीं न कहीं योगी सरकार की मंशा पर भी इशारा करता है कि क्या मौजूदा नेतृत्व पर सरकार अब भी भरोसा जताएगी या फिर पुलिस विभाग को एक नया नेतृत्व दिया जाएगा।

राजीव कृष्णा – सबसे प्रबल दावेदार

अगर बात की जाए संभावित नामों की, तो सबसे आगे राजीव कृष्णा का नाम है। वे 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में मुख्य सचिवालय में विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें सरकार का भरोसेमंद अधिकारी माना जाता है और उनके नाम को लेकर अटकलें इसलिए भी मजबूत हैं क्योंकि उनके पास गहरी प्रशासनिक समझ और पुलिसिंग का लंबा अनुभव है।

कहा जा रहा है कि योगी सरकार के साथ उनका अच्छा तालमेल रहा है और ऐसे में उन्हें अंतरिम नहीं बल्कि स्थायी डीजीपी बनाया जाना एक व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है।

क्या तिलोत्तमा वर्मा रचेंगी इतिहास?

राजीव कृष्णा के अलावा एक नाम और है जो इन दिनों चर्चा में है – तिलोत्तमा वर्मा। वर्तमान में डीजी प्रशिक्षण के पद पर तैनात तिलोत्तमा वर्मा अगर नियुक्त की जाती हैं, तो वह उत्तर प्रदेश की पहली महिला डीजीपी बनने का गौरव हासिल करेंगी।

हालाँकि वरिष्ठता में वह कुछ पुरुष अधिकारियों से पीछे हैं, लेकिन योग्यता, व्यवहारिकता और ट्रेनिंग के क्षेत्र में उनके काम को देखकर यह संभावना खारिज नहीं की जा सकती कि योगी सरकार इस बार कुछ अलग सोच सकती है।

दूसरे संभावित नाम:

  • दलजीत सिंह चौधरी – वर्तमान में BSF के डीजी हैं।

  • आलोक शर्मा – देश की SPG (Special Protection Group) के प्रमुख हैं।
    इन दोनों नामों को लेकर हालांकि सियासी हलकों में बहुत अधिक हलचल नहीं है, लेकिन प्रशासनिक सेवा के रिकॉर्ड को देखते हुए इन्हें भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

स्थायी या फिर कार्यवाहक – यही है बड़ा सवाल

एक बड़ी उलझन यह भी बनी हुई है कि क्या यूपी को इस बार स्थायी डीजीपी मिलेगा या फिर एक बार फिर ‘इंटरिम’ (कार्यवाहक) डीजीपी का प्रयोग दोहराया जाएगा? पिछले कुछ वर्षों में यूपी पुलिस का यह पद लगातार अस्थायी हाथों में ही रहा है, जिससे पुलिस प्रशासन में स्पष्ट नेतृत्व की कमी महसूस की जाती रही है।

यद्यपि योगी सरकार ने हाल ही में ‘पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश चयन एवं नियुक्ति नियमावली-2024’ को मंजूरी दे दी है, लेकिन अभी तक इस प्रक्रिया की असली शुरुआत नहीं हुई है।

  • चयन समिति का गठन अभी नहीं हुआ है।

  • UPSC को संभावित नामों की सूची भी नहीं भेजी गई है।

इस देरी के चलते संभावना है कि फिलहाल एक बार फिर से कार्यवाहक डीजीपी की ही नियुक्ति की जाए, जब तक पूरी चयन प्रक्रिया नहीं हो जाती।

राजनीति और पुलिस की कड़ी – एक बार फिर आमने-सामने

DGP पद जैसे संवेदनशील और प्रभावशाली स्थान के लिए नाम तय करना सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं होता, उसमें राजनीतिक समीकरण भी जुड़ जाते हैं।

  • सेवा विस्तार की संभावना को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

  • वहीं सरकार के सामने एक ऐसा नाम तय करने की चुनौती है, जो प्रशासनिक दृष्टि से मजबूत हो और राजनीतिक रूप से भी संतुलित।