चंडीगढ़, 29 जुलाई: केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में अपने वीडियो संदेश के माध्यम से दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत में सहकारिता अब पारंपरिक सीमाओं से बहुत आगे निकल चुकी है।
अब यह न केवल कृषि, वित्त और ग्रामीण विकास तक सीमित है, बल्कि डिजिटल सेवाओं, ऊर्जा, जैविक खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में भी आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की आधारशिला बन चुकी है।
कार्यक्रम का आयोजन और विषय
यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के न्यूयॉर्क मुख्यालय में भारत, केन्या और मंगोलिया के स्थायी मिशनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
विषय था –
“सहकारिता और सतत विकास: गति बनाए रखना और नई संभावनाएं तलाशना”
अमित शाह का संदेश इसी अवसर पर प्रसारित हुआ, जो सहकारिता के महत्व को वैश्विक मंच पर रेखांकित करता है।
अमित शाह के मुख्य बिंदु – सहकारिता की नई परिभाषा
| विषय | बयान और निष्कर्ष |
|---|---|
| सहकारिता की व्यापकता | “भारत में सहकारिता अब कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर डिजिटल सेवाओं, ऊर्जा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी मजबूत भूमिका निभा रही है।” |
| स्थानीय से वैश्विक तक | “यह प्रणाली न केवल स्थानीय स्तर पर लाभ पहुंचाती है, बल्कि सम्मानजनक आजीविका का भी स्रोत बनती है।” |
| तकनीकी नवाचार और समावेशिता | “तकनीक के सहारे सहकारी संस्थाएं आज और अधिक पारदर्शी, प्रभावी और समावेशी बन चुकी हैं।” |
| शैक्षिक पहल | “भारत ने हाल ही में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की है, जो सहकारिता क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण और नेतृत्व विकास को बढ़ावा देगा।” |
| सतत विकास में भूमिका | “सहकारिता के सिद्धांत और जनकेंद्रित दृष्टिकोण इसे सतत एवं समावेशी विकास के सबसे प्रभावी मॉडलों में से एक बनाते हैं।” |
भारत की सहकारी प्रणाली: वैश्विक उदाहरण
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2021 में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना ने सहकारिता को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी।
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अमित शाह भारत के पहले सहकारिता मंत्री बने, और इसके बाद से देश में सहकारी आंदोलन को एक संगठित, डिजिटल और तकनीक-सक्षम दिशा मिली।
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जनसहभागिता, लोकतांत्रिक संचालन, और नवाचार के बल पर भारत की सहकारी संस्थाएं अब ऊर्जा, डिजिटल बैंकिंग, जैविक उत्पादों, और ग्रामीण स्टार्टअप्स तक पहुंच बना रही हैं।
सहकारिता का नया रूप – सिर्फ किसान नहीं, अब तकनीक, शिक्षा और उद्यमिता का साथी
| क्षेत्र | सहकारिता की भूमिका |
|---|---|
| कृषि | किसानों को सीधे बाजार से जोड़ना, कर्ज सुविधा, बीज एवं उर्वरक वितरण |
| स्वास्थ्य | ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थापना |
| ऊर्जा | सौर ऊर्जा जैसे विकल्पों में निवेश, ग्रामीण इलाकों की बिजली जरूरतों की पूर्ति |
| डिजिटल सेवाएं | सहकारी बैंकों में UPI, मोबाइल बैंकिंग और फिनटेक सेवाओं का विस्तार |
| शिक्षा | सहकारी विश्वविद्यालयों और प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना |
| वित्तीय समावेशन | माइक्रोफाइनेंस और महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से वित्तीय पहुंच |
राजदूत पर्वतनेनी हरीश की टिप्पणी
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि “सहकारी संस्थाओं ने भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह मॉडल अब वैश्विक जरूरत बन चुका है।”
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