अब फर्जीवाड़े की नहीं कोई गुंजाइश — UIDAI का बड़ा फैसला, मृतकों के 65 लाख आधार नंबर किए रद्द!

चंडीगढ़, 14 जुलाई: देश में आधार कार्ड आज हर नागरिक की पहचान का सबसे मजबूत दस्तावेज बन चुका है। बैंक खाते खोलने से लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तक, आधार की आवश्यकता हर जगह होती है। लेकिन इसी अहम दस्तावेज का दुरुपयोग रोकने के लिए UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) ने एक साहसिक और ज़रूरी कदम उठाया है।

UIDAI ने एक विशेष अभियान के तहत देशभर में मृत व्यक्तियों के आधार कार्ड निष्क्रिय करना शुरू कर दिया है, ताकि उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल न हो सके। इस अभियान के तहत अब तक सिर्फ बिहार राज्य में ही 65 लाख से अधिक आधार कार्ड रद्द किए जा चुके हैं।

 क्यों हटाए जा रहे हैं मृतकों के आधार कार्ड?

UIDAI का यह कदम आधार प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए उठाया गया है। कई बार ऐसा देखा गया है कि जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी होती है, उनके आधार नंबरों का इस्तेमाल धोखाधड़ी में किया जाता है — जैसे कि फर्जी पेंशन लेना, गलत तरीके से सरकारी लाभ उठाना या पहचान छिपाकर अपराध करना।

इस अभियान के फायदे:

सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों को मिलेगा
फर्जी पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी पर रोक लगेगी
डेटा की स्वच्छता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी
चुनावों में फर्जीवाड़ा रोकने में मदद मिलेगी (खासकर बिहार जैसे राज्यों में जहाँ चुनाव नजदीक हैं)

 आधार कार्ड की संख्या में बड़ी गिरावट

UIDAI के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में अब तक 12 करोड़ 9 लाख 36 हजार 645 आधार कार्ड जारी किए जा चुके थे। लेकिन मृत व्यक्तियों के आधार कार्ड को सिस्टम से हटाने के बाद यह संख्या घटकर 11 करोड़ 43 लाख 50 हजार 755 रह गई है। यानी कि केवल बिहार में ही 65 लाख 85 हजार 890 आधार नंबरों को निष्क्रिय कर दिया गया है।

 कैसे की जा रही है यह प्रक्रिया?

यह बेहद संवेदनशील और सतर्कता से की जाने वाली प्रक्रिया है, ताकि कोई भी जीवित व्यक्ति गलती से इस सूची में न आ जाए। UIDAI इस कार्य के लिए तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर कदम उठा रहा है:

मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर सत्यापन किया जा रहा है।
स्थानीय निकायों — जैसे नगर निगम, ग्राम पंचायतों से प्राप्त जानकारी को उपयोग में लिया जा रहा है।
परिवार के सदस्यों द्वारा दी गई सूचना भी इस प्रक्रिया का आधार बन रही है।

हर मामले में सत्यापन सुनिश्चित करने के बाद ही किसी आधार को सिस्टम से हटाया जा रहा है।

 फर्जी आधार कार्ड और ऑपरेटरों पर कार्रवाई

UIDAI ने सिर्फ मृतकों के आधार ही नहीं, बल्कि फर्जी आधार कार्ड बनाने में लिप्त आधार केंद्रों और ऑपरेटरों पर भी सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। हाल की जांचों में पाया गया कि कुछ ऑपरेटरों ने नियमों की अनदेखी कर फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए आधार कार्ड बनाए।

इन मामलों में UIDAI ने:

  • दोषी ऑपरेटरों पर जुर्माना लगाया है

  • कई मामलों में लाइसेंस रद्द कर दिए हैं

  • फर्जी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है

 UIDAI की जनता से अपील

UIDAI ने देशवासियों से भी इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है:

🔹 अगर किसी मृत परिजन का आधार कार्ड अब भी सक्रिय है, तो उसे निष्क्रिय करवाने की प्रक्रिया जल्द पूरी करें।
🔹 आधार से जुड़ी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत विभाग को दें।
🔹 अपने आधार डेटा को नियमित रूप से अपडेट कराते रहें।