चंडीगढ़, 11 जुलाई: फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की प्रस्तावित रिलीज को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए उस पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है। यह फिल्म 2022 में राजस्थान के उदयपुर शहर में हुए दर्जी कन्हैयालाल की जघन्य हत्या पर आधारित है। कोर्ट का मानना है कि फिल्म के कुछ दृश्य और उसका संपूर्ण विषयवस्तु सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे देश में तनाव का माहौल बन सकता है।
इस अंतरिम रोक के पीछे मुख्य तर्क यह दिया गया है कि फिल्म से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं, और इससे समाज में सांप्रदायिक तनाव या हिंसा फैलने की आशंका भी जताई गई है। दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला लिया गया। याचिका में दावा किया गया है कि फिल्म के कुछ अंश खास तौर पर एक धार्मिक समुदाय को निशाना बनाते हैं और यह भारत के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के विरुद्ध है।
फैसले की बारीकियाँ और कोर्ट की टिप्पणियाँ:
दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति अनीश दयाल शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारत सरकार को सिनेमेटोग्राफ एक्ट, 1952 की धारा 6 के तहत यह अधिकार प्राप्त है कि वह किसी भी फिल्म की रिलीज पर रोक लगा सकती है, अगर ऐसा प्रतीत हो कि वह फिल्म सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जब तक केंद्र सरकार इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले लेती, तब तक फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ की रिलीज पर अस्थायी रूप से रोक लगी रहेगी। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद को यह सलाह दी है कि वह फिल्म की प्रमाणन प्रक्रिया (CBFC सर्टिफिकेट) को चुनौती देने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष औपचारिक आवेदन दाखिल करे।
सरकार से मांगी गई रिपोर्ट:
कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस पूरे विवाद और फिल्म की विषयवस्तु की समीक्षा कर सात दिनों के भीतर एक स्पष्ट निर्णय ले और उस फैसले की जानकारी अदालत को भी प्रदान करे।
फिल्म से जुड़े विवाद की पृष्ठभूमि:
‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म का ट्रेलर 26 जून 2025 को लॉन्च किया गया था। यह फिल्म 28 जून 2022 को उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की हत्या की सच्ची घटना पर आधारित है। हत्या का यह मामला पूरे देश में चर्चित हुआ था, जिसमें आरोपी धार्मिक कट्टरता से प्रेरित होकर नृशंस हत्या करते नजर आए थे।
ट्रेलर के सामने आने के बाद, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी की ओर से फिल्म के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में कहा गया कि फिल्म के कुछ दृश्य एक विशेष धार्मिक समुदाय को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिससे धार्मिक कटुता को बढ़ावा मिल सकता है और संवेदनशील माहौल प्रभावित हो सकता है।
सेंसर बोर्ड का पक्ष और अगला कदम:
सुनवाई के दौरान सेंसर बोर्ड (CBFC) ने अदालत को बताया कि उन्होंने फिल्म में से सभी विवादित और आपत्तिजनक दृश्यों को हटा दिया है। हालांकि, कोर्ट ने यह तय किया कि याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग दिखाई जाएगी, ताकि वह खुद यह देख सकें कि फिल्म में कोई आपत्तिजनक या भड़काऊ सामग्री अब भी शेष है या नहीं।
अगर कपिल सिब्बल को यह फिल्म संतुलित और संवैधानिक दायरे में लगती है, तब ही इसके रिलीज पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
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