दिल्ली एनसीआर में ठंड के साथ साथ वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। वही लगातार बच्चों का इलाज करते हुए डॉक्टरों का कहना है कि शहर के छोटे निवासी लगातार पुरानी सांस की बीमारियों और श्वसन संबंधी जटिलताओं का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदूषित हवा के लगातार संपर्क में रहने से बच्चों के विकसित हो रहे फेफड़ों पर गंभीर असर पड़ रहा है।
वही दिल्ली के कई इलाकों में AQI 400 के पार यानी गंभीर श्रेणी में पहुंच गया जो हेल्थ के लिए बेहद ही नुकसानदायक माना जा रहा है। सुबह के वक्त सड़कों पर धुंध की इतनी मोटी चादर है कि विज़िबिलिटी बेहद कम हो गई है जिससे गाड़ियो की रफ्तार बेहद थम गई ।
नोएडा के हाल है बेहाल
वही नोएडा में भी 1 दिसंबर से 7 दिसंबर तक पीएम 2.5 का स्तर लगातार ‘लाल’ श्रेणी में बना रहा. 7 दिसंबर को 317 का एक्यूआई दर्ज किया गया है. सेक्टर-125 में 348, सेक्टर-62 में 300, सेक्टर-1 में 345 और सेक्टर-116 में 345 का स्तर रिकॉर्ड किया गया है।
गाजियाबाद भी खतरे के ज़द में
बढ़ते वायू प्रदूषण ने गाजियाबाद की स्थिति भी बेहद खराब कर दी है। लोनी का स्तर सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 380 के पार पहुंच चुका है.
जहरीली हवा का लोगों ही हेल्थ पर हो रहा बुरा असर
बढ़ती जहरीली हवा का सीधा असर लोगों की सेहत पर दिखने लगा है. अस्पतालों में सांस की बीमारी, अस्थमा, एलर्जी, आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इसको लेकर डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण का असर खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे मरीजों पर ज्यादा पड़ रहा है.
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