गोवर्धन पूजा का पर्व आज, जानें महत्व, कथा और पूजा विधि

आज देश भर में 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जा रहा है । गोवर्धन पूजा का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। गोवर्धन पूजा का पर्व दिवाली के अगले दिन मनाया जाता है । दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा क्यों की जाती है चलिए आपको बताते हैं.दिवाली का त्योहार पांच दिनों तक मनाया जाता है.पहले दिन धनतेरस, दूसरे दिन नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली, तीसरे दिन बड़ी दिवाली, चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पांचवें दिन भाई दूज मनाया जाता है.

गोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन पर्वत, गिरिराज की महाराज और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है.गोवर्धन पूजा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत से जुड़ा है.ऐसी मान्यता है कि, प्राचीन काल में दिवावी के अगले दिन भारत में और खासकर ब्रज मण्डल में इंद्र की पूजा हुआ करती थी. एक बार भगवान कृष्ण ने इंद्र देव की पूजा को लेकर कहा कि, “इंद्र की पूजा का कोई लाभ नहीं इसलिए हमें गऊ के वंश की उन्नति के लिए पर्वतों और वृक्षों की पूजा करनी चाहिए”इसके बाद गोकुल के लोगों भगवान कृष्ण की बात मान कर सभी ने पर्वत वन और गोबर की पूजा आरम्भ की.जब इंद्र ने यह देखा तो क्रोधित होकर भारी वर्षा की और लोग परेशान हो गए.

 

इसके बाद श्रीकृष्ण ने अफनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर गोकुलवासियों और गायों की रक्षा की थी इससे इंद्र का घमंड टूट गया और अपनी गलती को स्वीकार कर वर्षा बंद कर दी.माना जाता है जब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाया था तब कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि थी. तभी से इस तिथि को गोवर्धन पूजा के रूप में मनाया जाता है जो दिवाली के बाद आती है.गोवर्धन पूजा को कई जगहों पर अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है इसका सनातन धर्म में विशेष महत्व माना जाता है।इस दिन भक्त अपने घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन भगवान की मूर्ति बनाकर उसे फूलों से सजाते हैं।फिर भगवान को कई तरह के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। आमतौर पर भगवान गोवर्धन को लेटे हुए पुरुष के रूप में बनाया जाता है

 

और उनकी नाभि के स्थान पर मिट्टी का दीपक रखा जाता है। पूजा करते समय इस दीपक में दूध, दही, शहद, गंगाजल, बताशे आदि डाले जाते हैंबाद में इन्हें प्रसाद रूप में सभी में बांट दिया जाता है।

गोवर्धन पूजा विधि 

  • गोवर्धन पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  • यदि आपके घर में गाय या फिर बछड़ा है, तो उन्हें रंगों और मोरपंख से सजाएं और उनके सींग पर तेल या गेरू लगाएं।

  • शुभ मुहूर्त में गोवर्धन भगवान की आकृति बनाएं।

  • साथ में मवेशियों और गाय, बछड़े की भी आकृति बनाएं।

  • पर्वत और आकृतियों को अपमार्ग (चिरचिटा) से सजाएं।

  • फिर विधि-विधान गोवर्धन की पूजा करें।

  • गोवर्धन भगवान की नाभि वाली जगह पर एक मिट्टी का दीपक रखा जाता है। फिर इस दीपक में दही, गंगा जल, शहद, बताशे, दूध आदि चीजें डालें और पूजा के बाद इसे प्रसाद रूप में सभी लोगों में बांट दें।

  • परिक्रमा के समय हाथ में कलश लेकर जल की धारा डालते हुए सात बार परिक्रमा करें।

  • जौ के बीज बिखेरते हुए परिक्रमा  पूरी करनी चाहिए हैं।

  • इस दिन भगवान कृष्ण की भी पूजा होती है। इसके लिए भगवान कृष्ण की प्रतिमा को दूध, दही और गंगाजल से स्नान कराएं।

  • पुष्प, कुमकुम-हल्दी, चन्दन और अक्षत चढ़ाएं।

  • षोडशोपचार पूजन करें और अंत में आरती करके पूजन संपन्न करें।

  • गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त 22 अक्टूबर 2025 की सुबह 06:30 से 08:47 बजे तक रहेगा। वहीं गोवर्धन पूजा का शाम का समय दोपहर 03:36 से शाम 05:52 बजे तक रहेगा।

  • “ॐ गोवर्धनाय नमः”

  • ऊं श्रीकृष्णाय गोवर्धनाय नमः

  • मंत्र का जाप भी करना चाहिए जिससे भगवान श्री कृष्ण की विशेष कृपा मिलती है।