आज शरद पूर्णिमा ! चंद्रमा की रोशनी में रखें खीर और जाने शुभ मुहूर्त

आज शरद पूर्णिमा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शरद ऋतु की पूर्णिमा काफी महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है और इसी तिथि से शरद ऋतु का आरंभ भी होता है.

इस दिन चंद्रमा संपूर्ण होता है और 16 कलाओं से युक्त होता है. शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है और लोग इस अमृत को ग्रहण करते हैं.

जो जातक इस अमृत को ग्रहण करता है उसे धन, प्रेम और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रेम और कलाओं से परिपूर्ण होने के कारण श्रीकृष्ण ने इसी दिन महारास रचाया था.

इस दिन विशेष प्रयोग करके अच्छे स्वास्थ्य, प्रेम और धन का वरदान पाया जा सकता है

शरद पूर्णिमा की पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर यानी आज दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से शुरू होगी और तिथि का समापन 7 अक्टूबर की सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर होगा.

तो उदयातिथि के मुताबिक, शरद पूर्णिमा 6 सितंबर यानी आज ही मनाई जा रही है

 

खीर रखने का मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, खीर रखने का मुहूर्त 6 अक्टूबर यानी आज रात 10 बजकर 37 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 09 मिनट तक रहेगा, जो कि सबसे शुभ और लाभकारी मुहूर्त माना जा रहा है.

वहीं सनातन परंपरा में आश्विन मास की पूर्णिमा को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. कोई इसे शरद पूर्णिमा तो कोई कोजागर पूर्णिमा तो कोई रास पूर्णिमा मानकर इस दिन विधि-विधान से पूजा करता है.

शरद पूर्णिमा को आखिर क्यों कहते हैं रास पूर्णिमा और क्या है इसका भगवान श्रीकृष्ण से कनेक्शन

 

पूर्णिमा पर सिर्फ मन के कारक चंद्र देवता, धन की देवी मां लक्ष्मी या फिर जगत के पालनहार भगवान विष्णु भर की पूजा नहीं होती है, बल्कि इस दिन श्री हरि के पूर्णावतार भगवान श्री कृष्ण की भी विशेष पूजा की जाती है. हिंदू मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा की पावन रात्रि में ही भगवान श्री कृष्ण ने 16108 गोपियों के साथ वृंदावन में यमुना नदी के किनारे रास रचाया था. बंसीवट कहे जाने वाले कान्हा की इस लीला को रासलीला भी कहा जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण की इस महारास को देखने के लिए चंद्रमा ठहर गया था और भगवान शिव भी वेश बदलकर पहुंचे थे

 

कामदेव का अभिमान तोड़ने के लिए कान्हा ने रचाई रासलीला 

हिंदू मान्यता के अनुसार जब कामदेव ने अपना कामबाण चलाकर महादेव को माता पार्वती की ओर आकर्षित कराया तो उन्हें अपने शक्तियों पर अभिमान हो गया और वे सभी के सामने अपने इस ताकत का दंभ भरने लगे. जब यह बात भगवान श्रीकृष्ण को पता लगी तो उन्होंने 16108 गोपियों को वृंदावन में बुलाकर रास रचाया था. इसके लिए उन्होंने अपने अनेकों रूप धारण करके प्रत्येक गोपी के साथ अलग-अलग नृत्य किया.

 

मान्यता है कि इस दौरान कामदेव के बहुत जोर लगाने के बाद भी किसी गोपी के भीतर कामवासना प्रवेश नहीं हुई. कान्हा के इस महारास के बाद कामदेव का अभिमान दूर हो गया. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी रास पूर्णिमा पर उनके मंत्र ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीकृष्णाय गोविंदाय गोपीजन वल्लभाय श्रीं श्रीं श्री’ का जाप करने पर सभी दुख दूर और कामनाएं पूरी होती हैं.

महरास देखने के लिए महादेव  बन गये थे गोपी

 

पौराणिक मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण के इस महारास को देखने के लिए स्वयं देवों के देव महादेव भी वृंदावन के यमुना तट पर पहुंचे लेकिन यमुना नदी ने महारास को देखने की आज्ञा नहीं दी. तब भगवान शिव ने गोपी का रूप धारण करके रास लीला देखने का निश्चय किया. मान्यता है कि महादेव के इसी स्वरूप को उनके भक्तगण गोपेश्वर महादेव के रूप में पूजते हैं.

 

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की चांदनी में रखें खीर

आज संध्याकाल में दूध की खीर बनाकर अर्धरात्रि में भगवान को भोग लगाएं. उसके बाद चंद्रमा की पूजा करें और खीर का नेवैद्य अर्पित करें. खीर को चंद्रमा की चांदनी में रखें और अगले दिन सुबह प्रसाद के रुप में सभी को बांटे । रिपोर्ट न्यूज पीडिया24