चंडीगढ़, 29 जुलाई: सनातन धर्म में श्रावण मास का विशेष महत्व है, और इस मास में आने वाले मंगलवारों को मंगला गौरी व्रत के रूप में मनाया जाता है। इस व्रत का आध्यात्मिक और पारिवारिक जीवन में बहुत महत्व होता है। विशेषकर विवाहित स्त्रियों के लिए यह दिन अत्यंत फलदायक माना गया है। वे इस दिन माता पार्वती, जिन्हें मंगला गौरी के रूप में पूजा जाता है, का पूजन कर अपने पति की लंबी उम्र, सुखद दांपत्य जीवन, संतान की प्राप्ति और पारिवारिक समृद्धि की कामना करती हैं।
वर्ष 2025 में तीसरा मंगला गौरी व्रत मंगलवार, 29 जुलाई को रखा जाएगा। यह दिन व्रत रखने और पूजन करने के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है।
शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) – तीसरा मंगला गौरी व्रत 2025
पूजन एवं व्रत का आरंभ शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए जिससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन के कुछ प्रमुख और श्रेष्ठ मुहूर्त निम्नलिखित हैं:
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 03:59 बजे से 04:41 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11:38 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
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अमृत काल: प्रातः 11:42 बजे से दोपहर 01:25 बजे तक
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निशिता मुहूर्त: रात 11:43 बजे से 30 जुलाई को रात 12:26 बजे तक
इन मुहूर्तों में से किसी में भी श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत और पूजा की जा सकती है।
पूजा विधि (Puja Vidhi) – मंगला गौरी व्रत की संपूर्ण प्रक्रिया
इस विशेष व्रत की पूजा विधि पूरी श्रद्धा और पवित्रता से की जाती है। इसकी परंपरागत विधि निम्नलिखित है:
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प्रभात में उठकर स्नान करें: व्रत वाले दिन सूर्योदय से पूर्व उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मानसिक रूप से संकल्प लें कि आप आज का व्रत पूर्ण श्रद्धा से करेंगे।
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घर के मंदिर की सफाई करें: पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता मंगला गौरी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
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पूजन सामग्री अर्पित करें: माता को लाल फूल, चावल, रोली, हल्दी, कुमकुम, फल, पान, सुपारी, मिठाई, नारियल आदि अर्पित करें।
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16 श्रृंगार समर्पित करें: विवाहित स्त्रियां मां को 16 श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें जैसे – बिंदी, चूड़ियां, काजल, सिंदूर, मेहंदी, इत्र, अंगूठी, बिचुए, कंघी आदि।
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दीप प्रज्वलित करें: शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं और मां के समक्ष रखें।
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मंत्र जाप करें: मंगला गौरी के विशेष मंत्रों का जाप करें, जैसे –
“ॐ मंगल्यै गौरी नमः”
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“ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं गौर्यै नमः” -
आरती करें: मंत्र जाप के पश्चात माता मंगला गौरी की आरती करें और उनसे अपने वैवाहिक जीवन में सुख, सौभाग्य और संतान की प्राप्ति की प्रार्थना करें।
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व्रत कथा श्रवण करें: मंगला गौरी व्रत की कथा सुनना या पढ़ना अनिवार्य माना गया है। इससे व्रत पूर्ण होता है और उसका पुण्य बढ़ता है।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
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यह व्रत विशेष रूप से नवविवाहित स्त्रियों के लिए अनिवार्य माना जाता है, परंतु सभी विवाहित महिलाएं इसे कर सकती हैं।
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व्रत करने से वैवाहिक जीवन में सौहार्द, प्रेम और स्थायित्व बना रहता है।
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माता पार्वती की कृपा से स्त्रियों को सौभाग्य और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
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यह व्रत कष्टों को दूर कर घर में सुख-समृद्धि लाता है।
विशेष सुझाव
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व्रत के दिन संयमित आहार लें और मन, वचन, कर्म से पवित्र रहें।
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पूजा के समय मोबाइल, टीवी, आदि से दूर रहकर एकाग्रता बनाए रखें।
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व्रत के अंत में ब्राह्मण भोजन या दान का आयोजन करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
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