खाड़ी देशों में जारी जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आना-जाना पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, जंग शुरू होने के बाद से अब तक करीब 90 जहाज इस रास्ते से गुजर चुके हैं, जिनमें तेल ले जाने वाले टैंकर भी शामिल हैं। यह जलमार्ग दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के कच्चे तेल के परिवहन के लिए अहम माना जाता है।
भारतीय झंडे वाला तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ गुजरात के मुंद्रा स्थित अडाणी पोर्ट्स पर पहुंच गया है। यह UAE के फुजैराह पोर्ट से होर्मुज स्ट्रेट पार करते हुए आया है। इसपर 80,886 मीट्रिक टन यानी 5.8–6 लाख बैरल कच्चा तेल लदा है। भारत में हर रोज लगभग 5.5–5.6 मिलियन बैरल (करीब 90 करोड़ लीटर) तेल की खपत होती है।
ईरान ने ईजराइल से बदला लिया
वही वार प्रतिवार की प्रक्रिया रुक नही रही है ईरान ने इजराइल की राजधानी तेल अवीव समेत 100 से ज्यादा जगहों पर मंगलवार रात को मिसाइल अटैक किया। ईरान का कहना है कि यह हमला लारिजानी, उनके बेटे और बसीज फोर्स के कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी की मौत का बदला है।
इजराइल ने ईरान के इंटेलिजेंस मिनिस्टर निशाना बनाया
वही इजराइल ने ईरान के इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खातिब को निशाना बनाया है। यह दावा इजराइली मीडिया ने किया है। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले इजराइल ने सोमवार रात को ईरान के सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी और बसीज कमांडर गुलामरेजा सुल्तानी को निशाना बनाया था, जिसमें दोनों अधिकारियों की मौत हो गई।
अब यह जंग और ज्यादा भयानक ना हो इसके लिए जल्द UN की समुद्री संस्था इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) इमरजेंसी बैठक करने वाली है। यह बैठक इसलिए बुलाई गई है क्योंकि जंग की वजह से जहाजों और वहां काम करने वाले लोगों की सुरक्षा खतरे में है। इस बैठक में कई देश हिस्सा लेंगे और बड़े फैसले हो सकते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरब देश शुरू से ही इस जंग के खिलाफ थे और अब भी वे ही इसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर जंग लंबे समय तक चली तो हालात और बिगड़ेंगे और इसका असर पूरे इलाके पर पड़ेगा। हालांकि ईरान और कई अरब देश इस समय एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं, लेकिन एक बात पर सब सहमत है कि यह जंग तेजी से फैल सकती है और बड़े संकट में बदल सकती है। कई अरब नेताओं का कहना है कि इस पूरे संघर्ष के पीछे अमेरिका और इजराइल की बड़ी भूमिका है।
दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि इन हालात के लिए अमेरिका और इजराइल जिम्मेदार हैं। ईरान के मुताबिक, समुद्र में जो भी खतरा बढ़ा है, वह इन्हीं देशों की वजह से हुआ है।वहीं जापान, पनामा, सिंगापुर और UAE जैसे देश चाहते हैं कि फंसे हुए जहाजों और नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक सही प्लान बनाया जाए।
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