शारदीय नवरात्रि की धूम नवरात्र के 9 दिनों तक छाई रहती है। नवरात्र का छठा दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप कात्यायनी की पूजा को समर्पित है. इस दिन देवी की आराधना से भक्तों को सुख-शांति, समृद्धि और आशीर्वाद प्राप्त होता है. मान्यता है कि सही मुहूर्त में पूजा करने से मां कात्यायनी की विशेष कृपा मिलती है.नवरात्रि के छठें दिन भक्त माँ कात्यायनी की उपासना करते है। इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है व दुश्मनों का संहार करने में ये सक्षम बनाती हैं। माना जाता है इनका ध्यान गोधुली बेला में करना होता है
नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा की छठी विभूति मां कात्यायनी की पूजा का विधान है. उन्हें मातृत्व, शक्ति और दिव्य आशीर्वाद की देवी माना जाता है. भक्त जब मां कात्यायनी की आराधना करते हैं, तो उन पर देवी का कृपा-संवर्द्धन सदैव बना रहता है.
शारदीय नवरात्रि में षष्ठी तिथि में पूजा मुहुर्त
शारदीय नवरात्रि 2025 में षष्ठी तिथि 27 सितंबर को दोपहर 12:06 बजे से शुरू होकर 28 सितंबर दोपहर 2:28 बजे तक रहेगी. इस बार मां कात्यायनी की पूजा का शुभ दिन 28 सितंबर होगा. इसी दिन भक्त पूरे विधि-विधान से मां की आराधना करेंगे.
मां कात्यायनी की पूजा में कौन से मन्त्र का जप करें?
‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कात्यायनायै नम:’ के जप से आप मां दुर्गा के छठें स्वरुप मां कात्यायनी का आवाहन कर सकते हैं.
माता का भोग
ऐसी मान्यता है, कि देवी कात्यायनी को शहद अत्यंत प्रिय है। इसलिए, नवरात्रि के छठे दिन देवी कात्यायनी की पूजा में शहद या शहद से बनी चीज़ों का भोग लगाना चाहिए। देवी कात्यायनी के विधिवत पूजन के पश्चात महादेव की भी पूजा करने की मान्यता है।
मां कात्यायनी की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वनमीकथ नामक महर्षि के पुत्र कात्य से कात्य गोत्र की उत्पत्ति हुई. इसी गोत्र में आगे चलकर महर्षि कात्यायन का जन्म हुआ. उनकी कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने मां भगवती को पुत्री के रूप में प्राप्त करने की इच्छा से कठोर तपस्या की. उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती प्रकट हुईं और वचन दिया कि वे उनके घर पुत्री रूप में अवतरित होंगी. इसी बीच तीनों लोकों पर महिषासुर नामक दैत्य ने अत्याचार बढ़ा दिए. उसके आ/तंक से परेशान देवताओं ने ब्रह्मा, विष्णु और महादेव से सहायता मांगी. तब त्रिदेव के तेज से प्रकट होकर मां ने महर्षि कात्यायन के घर जन्म लिया. पुत्री के रूप में अवतरित होने के कारण वे कात्यायनी नाम से प्रसिद्ध हुईं. रिपोर्ट न्यूज पीडिया24
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