UGC के नये नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। सुप्रिम कोर्ट ने यह रोक अगले आदेश तक लगा दी है। कोर्ट का कहना है इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि ये नए नियम अस्पष्ट (vague) हैं और इनके दुरुपयोग की पूरी आशंका है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान काफी सख्त टिप्पणियां कीं. CJI ने कहा कि हमें जातिविहीन समाज की तरफ बढ़ना चाहिए, उल्टी दिशा में नहीं जाना चाहिए. उन्होंने ये भी पूछा कि क्या हम सही रास्ते पर हैं या नहीं और जिन्हें सुरक्षा की जरूरत है.उनके लिए सही व्यवस्था होनी चाहिए. कोर्ट का कहना था कि अगर ऐसे नियम बिना ठीक से सोचे-समझे लागू हुए तो समाज में बंटवारा बढ़ेगा और गंभीर असर पड़ेगा.
ये नियम कई याचिकाकर्ताओं जैसे मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान ने चुनौती दी थी. उनका आरोप था कि ये नियम जनरल कैटेगरी के खिलाफ भेदभाव बढ़ावा देते हैं, मनमाने हैं, संविधान का उल्लंघन करते हैं और UGC एक्ट 1956 के भी खिलाफ हैं. खासकर जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा को सिर्फ SC, ST, OBC तक सीमित करने पर सवाल उठाए गए थे जिससे बाकी वर्गों को सुरक्षा नहीं मिलती और ये नियम भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगे। इसके साथ ही सवर्ण छात्रों का आरोप है इस नियम से सवर्ण छात्रों को स्वाभाविक अपराधी बना दिए गए है इससे इनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा।
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