चंडीगढ़, 4 जुलाई: सोशल मीडिया पर देश विरोधी सामग्री पर अब लगाम कसने की तैयारी तेज हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा एक नई व्यापक नीति पर काम शुरू कर दिया गया है, जिसके तहत भारत विरोधी पोस्ट, वीडियो और ऑनलाइन गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई संभव होगी। इस नीति का उद्देश्य स्पष्ट है — भारत की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ चल रही डिजिटल गतिविधियों को जड़ से खत्म करना।
यह नीति ऐसे समय में सामने आ रही है जब देश में हाल ही में आतंकवाद से जुड़ी कुछ घटनाओं और अलगाववादी प्रचार के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं।
क्या है नई नीति का उद्देश्य?
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय के नेतृत्व में एक विशेष निगरानी व्यवस्था तैयार की जा रही है जो सोशल मीडिया पर फैल रही देश विरोधी गतिविधियों की नज़रबानी करेगी।
नीति के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
-
देश विरोधी वीडियो और पोस्ट को तुरंत ट्रेस और ब्लॉक किया जाएगा।
-
ऐसे कंटेंट को फैलाने वाले हैंडल और अकाउंट्स स्थायी रूप से ब्लॉक किए जाएंगे।
-
संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही भी की जाएगी।
-
कंटेंट अपलोड करने वाले नेटवर्क की जांच और ट्रैकिंग की जाएगी, चाहे वे देश में हों या विदेश में।
खास टीम होगी तैनात
इस पूरे अभियान की निगरानी के लिए एक विशेष सेल गठित किया जा रहा है, जिसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), सीबीआई, साइबर विशेषज्ञ और राज्य पुलिस बलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह टीम ऐसे सोशल मीडिया कंटेंट की निगरानी करेगी जो भारत की सुरक्षा, धार्मिक सद्भाव या राष्ट्र की छवि को प्रभावित कर सकते हैं।
विदेशी सरकारों और सोशल मीडिया कंपनियों से सहयोग
इस नीति की सफलता के लिए केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी समन्वय कर रही है। अमेरिका की सरकार और प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियाँ — जैसे कि X (पूर्व में Twitter), Meta (Facebook, Instagram), YouTube और WhatsApp — से बात की जा रही है ताकि उनके प्लेटफॉर्म पर भारत विरोधी कंटेंट अपलोड न होने पाए।
भारत सरकार चाहती है कि ये कंपनियाँ खुद भी ऐसी सामग्री को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएँ, ना कि केवल सरकार के निर्देश पर ही कार्य करें।
खालिस्तानी गतिविधियों और हालिया हमलों से जुड़े हैं संकेत
सूत्र बताते हैं कि यह नई पहल खालिस्तान समर्थक गतिविधियों और हाल में हुए आतंकी घटनाओं से प्रेरित है।
गुरपतवंत सिंह पन्नू जैसे चरमपंथी लगातार सोशल मीडिया के ज़रिए भारत-विरोधी और भड़काऊ प्रचार कर रहे हैं। इसी तरह, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भी सोशल मीडिया पर कई आपत्तिजनक और देश की एकता को चुनौती देने वाली पोस्ट वायरल हुईं।
सरकार का मानना है कि ऐसे प्रचारों को रोकना केवल सुरक्षा बलों का काम नहीं, बल्कि डिजिटल फ्रंट पर भी मजबूत क़दम उठाने की जरूरत है।
क्या-क्या हो सकता है ब्लॉक या बैन?
नीति के दायरे में निम्नलिखित प्रकार का कंटेंट आ सकता है:
-
अलगाववादी विचारधारा फैलाने वाले वीडियो और पोस्ट
-
धार्मिक नफरत या जातिगत भेदभाव फैलाने वाला कंटेंट
-
आतंकवाद का महिमामंडन करने वाली सामग्री
-
विदेशी एजेंडे के तहत चल रहे “फ़ेक न्यूज नेटवर्क”
-
भारत के संवैधानिक ढांचे को बदनाम करने वाली सामग्री
क्या मिलेगा इससे फायदा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह नीति ठोस तरीके से लागू की जाती है, तो इससे भारत की आंतरिक सुरक्षा को और मज़बूती मिलेगी। सोशल मीडिया के जरिए जो मन:स्थिति पर प्रभाव डालने वाली गतिविधियाँ होती हैं, उन पर अंकुश लगेगा।
-
नकली खबरों और अफवाहों पर नियंत्रण होगा
-
विदेशी फंडिंग और नेटवर्किंग की कोशिशों पर ब्रेक लगेगा
-
सांप्रदायिक तनाव और दंगे भड़काने की साजिशों पर रोक संभव होगी
कब तक लागू हो सकती है यह नीति?
गृह मंत्रालय इस नीति को सितंबर 2025 तक अंतिम रूप दे सकता है। इसके बाद इसे संसद की समिति के समक्ष रखा जाएगा, और आवश्यक संसोधन के साथ लागू किया जा सकता है।
संभावना है कि इस नीति को “डिजिटल देशविरोध रोकथाम नीति” के नाम से प्रस्तुत किया जाए।
Top Tags