चंडीगढ़, 24 जुलाई: महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक ऐसी समस्या, जो अक्सर चुपचाप अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है और जब तक असर दिखता है, तब तक देर हो चुकी होती है। बात हो रही है—”साइलेंट फाइब्रॉइड्स” की।
क्या हैं साइलेंट फाइब्रॉइड?
फाइब्रॉइड यानी गर्भाशय में विकसित होने वाली एक सामान्य, लेकिन गैर-कैंसरयुक्त गांठ।
अक्सर ये पहचान में तब आते हैं जब महिला को गर्भधारण में परेशानी होती है या बार-बार गर्भपात होता है।
लेकिन कई बार ये बिना किसी बाहरी लक्षण के चुपचाप शरीर को भीतर से प्रभावित करते रहते हैं।
चंडीगढ़ की ‘मेघा’ (बदला हुआ नाम) जैसी कई महिलाएं हैं जिन्हें सिर्फ सामान्य हेल्थ चेकअप या बांझपन के इलाज के दौरान ही इन ‘साइलेंट’ फाइब्रॉइड्स का पता चलता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
डॉ. हीना चावला, स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार:
“हर महीने मेरे पास आने वाली 30% महिलाएं ऐसी होती हैं जिनमें फाइब्रॉइड होते हैं, लेकिन किसी भी प्रकार के पारंपरिक लक्षण नहीं दिखाई देते।”
डॉ. वंदना नरूला, इनफर्टिलिटी एक्सपर्ट के मुताबिक:
“सबम्यूकोसल या इंट्राम्यूरल फाइब्रॉइड्स गर्भाशय की अंदरूनी दीवार को इस तरह बाधित कर देते हैं कि भ्रूण को टिकने का अवसर ही नहीं मिलता। और महिला को यह तक नहीं पता चलता कि बार-बार मिसकैरेज क्यों हो रहा है।”
फाइब्रॉइड के संभावित संकेत:
✔️ पीरियड्स के दौरान असामान्य या अत्यधिक रक्तस्राव
✔️ पेट या पेल्विक हिस्से में भारीपन, दर्द
✔️ बार-बार पेशाब आना या पेशाब में रुकावट
✔️ पेट में सूजन, कमजोरी, थकान या एनीमिया
✔️ लंबे समय से कब्ज या टांगों में दर्द
कुछ मामलों में, बड़ा फाइब्रॉइड मूत्र मार्ग को ब्लॉक कर सकता है, जिससे संक्रमण तक की नौबत आ सकती है।
क्या सभी फाइब्रॉइड खतरनाक होते हैं?
नहीं।
ज्यादातर छोटे आकार के फाइब्रॉइड्स लक्षण नहीं देते और शरीर के लिए खतरा नहीं होते। लेकिन अगर गर्भधारण में समस्या हो, मासिक धर्म अनियमित हो, या शरीर में कोई भी असामान्य बदलाव दिखे — तो देर न करें। समय रहते जाँच ज़रूरी है।
क्यों ज़रूरी है जागरूकता?
हर महिला का शरीर अलग होता है, और हर बदलाव एक कहानी कहता है।
फाइब्रॉइड एक आम समस्या है, लेकिन ‘साइलेंट’ फॉर्म में यह बेहद जटिल हो सकती है — खासतौर पर तब, जब यह बिना दर्द या लक्षण के गर्भाशय में अपना असर डाल रही हो।
समाधान क्या है?
🔹 समय पर अल्ट्रासाउंड जांच
🔹 होर्मोनल थेरेपी या जरूरत अनुसार सर्जरी
🔹 फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट की सलाह लेना
🔹 संतुलित आहार और स्ट्रेस प्रबंधन भी लक्षणों को नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है।
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