बायोस्टिमुलेंट घोटाले पर सख्त हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, कहा – “किसानों से किसी भी कीमत पर धोखा नहीं होने देंगे”

चंडीगढ़, 15 जुलाई: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री डॉ. शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि भवन, नई दिल्ली में बायोस्टिमुलेंट उत्पादों को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री ने बायोस्टिमुलेंट उत्पादों की गुणवत्ता, परीक्षण, अनुमोदन प्रक्रिया और इनके बाजार में बढ़ते फर्जीवाड़े पर गंभीर चिंता जताई।

बैठक के प्रमुख बिंदु:

किसानों से फीडबैक के बाद सख्त रुख

डॉ. चौहान ने बताया कि हाल ही में उनके द्वारा विभिन्न राज्यों में चलाए गए “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के दौरान किसानों ने नकली खाद, बीज, कीटनाशक और बायोस्टिमुलेंट को लेकर शिकायतें की थीं। मंत्री ने कहा, “किसानों की पीड़ा देखकर मैं चुप नहीं बैठ सकता। यह मेरी जिम्मेदारी है कि उन्हें न्याय मिले।”

बायोस्टिमुलेंट पर गंभीर सवाल

मंत्री ने तीखे तेवर दिखाते हुए पूछा:

  • बायोस्टिमुलेंट कब से बिक रहे हैं और उनका वैज्ञानिक इतिहास क्या है?

  • आज तक कुल कितने उत्पाद पंजीकृत हुए हैं और उनमें से कितने प्रभावी सिद्ध हुए हैं?

  • ICAR के पास क्या ऐसा डेटा है जो यह साबित करता हो कि इनसे उत्पादन में वास्तव में बढ़ोतरी हुई है?

  • नकली और असली उत्पाद की पहचान का क्या तंत्र है?

  • यदि कोई गड़बड़ी होती है तो कार्रवाई के क्या प्रावधान हैं?

वैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी

डॉ. चौहान ने निर्देश दिया कि अब कोई भी बायोस्टिमुलेंट उत्पाद तभी बाजार में बेचा जा सकेगा जब वह ICAR से वैज्ञानिक रूप से परीक्षणित और प्रमाणित हो। उन्होंने कहा, “हम केवल वही उत्पाद अनुमोदित करेंगे जो किसानों के हित में हों, वैज्ञानिक मापदंडों पर खरे उतरें, और पूरी पारदर्शिता से मूल्यांकन हों।”

फर्जी कंपनियों पर कार्रवाई के निर्देश

मंत्री ने कहा, “कुछ बेईमान कंपनियां बिना किसी प्रभावशीलता के उत्पाद बेच रही हैं, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है।” उन्होंने अफसरों से सवाल किया कि:

  • 30,000 बायोस्टिमुलेंट उत्पाद बाजार में कैसे बिकने लगे?

  • पिछले 4 वर्षों में घटकर 8,000 और अब 650 उत्पाद क्यों रह गए?

  • पहले अधिकारी क्या कर रहे थे?

डॉ. चौहान ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी संदिग्ध निर्माता को बख्शा नहीं जाएगा और सभी दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

नई SOP और सैंपलिंग सिस्टम बनाने के निर्देश

बैठक में मंत्री ने नए नियम, गाइडलाइंस और SOP (Standard Operating Procedures) तैयार करने का निर्देश भी दिया ताकि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां रोकी जा सकें। उन्होंने कहा कि हर उत्पाद का फील्ड ट्रायल, टेस्टिंग, रजिस्ट्रेशन, और निगरानी की पारदर्शी प्रणाली होनी चाहिए।

मंत्री का स्पष्ट संदेश:

“किसान हमारे लिए सर्वोपरि हैं। ICAR और कृषि मंत्रालय का उद्देश्य किसानों का भला होना चाहिए, न कि कंपनियों का फायदा। अब कोई भी फैसला वैज्ञानिक साक्ष्य और पारदर्शी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।”