चंडीगढ़, 1 जुलाई: पिछले तीन महीनों में भारतीय शेयर बाजार ने जो तेजी दिखाई है, वह कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। सेंसेक्स ने करीब 12,000 अंकों की छलांग लगाई और बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹461 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो पहले के मुकाबले करीब ₹72 लाख करोड़ की बढ़ोतरी दर्शाता है। इस शानदार प्रदर्शन ने जहां निवेशकों को अच्छी कमाई का मौका दिया, वहीं अब बाजार को लेकर सावधानी की जरूरत भी उतनी ही बढ़ गई है।
तेजी का असली कारण: पैसा, पैसा और सिर्फ पैसा
बाजार की यह तेज रफ्तार मुख्यतः लिक्विडिटी, यानी बाजार में उपलब्ध धन की अधिकता की वजह से आई है।
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घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने पिछले तीन महीनों में ₹3.5 लाख करोड़ से अधिक का निवेश किया है।
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विदेशी निवेशक (FPIs) भी लगातार खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बाजार में उत्साह बना हुआ है।
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म्यूचुअल फंड हाउस के पास मई महीने में ₹2.17 लाख करोड़ की नकदी थी, जबकि हर महीने ₹26,000 करोड़ से अधिक का निवेश SIP के जरिए हो रहा है।
JM फाइनेंशियल के वेंकटेश बालासुब्रमण्यम मानते हैं कि, “यह रैली पूरी तरह से लिक्विडिटी-ड्रिवन है। फंडामेंटल्स ने इसे सपोर्ट नहीं किया, सिर्फ धन की उपलब्धता ने बाजार को ऊपर खींचा है।”
वैल्यूएशन बनाम हकीकत: सतह के नीचे खतरा
कई विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार अब अपने औसत वैल्यूएशन से ऊपर ट्रेड कर रहा है — चाहे वो लार्ज कैप, मिड कैप या स्मॉल कैप शेयर हों।
कोटक AMC के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह कहते हैं:
“पिछले 5 वर्षों में जो रिटर्न मिला है, वैसा रिटर्न अगले कुछ वर्षों में दोहराना मुश्किल है। मौजूदा बाजार वैल्यूएशन या तो फेयर है या हल्का ओवरवैल्यूड। अब से रिटर्न कमाई की वास्तविक वृद्धि (earnings growth) पर निर्भर करेगा, जो फिलहाल 8-12% तक ही दिख रही है।”
वे निवेशकों को सलाह देते हैं कि:
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पूरी पूंजी सिर्फ इक्विटी में न लगाएं।
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REITs, InvITs, डेट फंड्स, गोल्ड और ETFs जैसे विकल्पों पर भी ध्यान दें।
कहां मिल सकते हैं मौके?
RBI के हालिया कदम — रेपो रेट में कटौती और CRR में बदलाव — ने बाजार में नकदी बढ़ा दी है। इससे खास तौर पर कुछ क्षेत्रों को फायदा हुआ है:
फाइनेंशियल सेक्टर में गति:
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PFC और REC जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसर्स में अच्छी संभावनाएं दिख रही हैं।
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PSU बैंक इंडेक्स भी छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
IT सेक्टर में निवेश का मौका:
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अब तक सुस्त रहे IT शेयरों में बेहतर डिविडेंड यील्ड (2–2.5%) और अपेक्षाकृत कम वैल्यूएशन के कारण निवेश लायक स्थिति बनी है।
केमिकल सेक्टर में स्थिरता की वापसी:
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दो साल की गिरावट के बाद अब इसमें रिकवरी की संभावना जताई जा रही है।
फार्मा और एक्सपोर्ट सेक्टर्स में सतर्कता जरूरी:
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अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता बरकरार है, जिससे फार्मा और केमिकल जैसे निर्यात-आधारित क्षेत्रों में जोखिम बना हुआ है।
क्या निवेशक सतर्क हो जाएं?
9 जुलाई को अमेरिकी टैरिफ को लेकर एक बड़ी डेडलाइन आने वाली है और साथ ही Q1 के वित्तीय नतीजे भी जारी होंगे। ये दोनों ही घटनाएं बाजार की दिशा तय कर सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन घटनाओं से पहले निवेशकों को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना चाहिए।
निवेशकों के लिए जरूरी सलाह:
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लालच से बचें: बड़ी तेजी के बाद गिरावट का खतरा सबसे अधिक होता है।
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पोर्टफोलियो में संतुलन बनाएं: इक्विटी, डेट, गोल्ड और अन्य विकल्पों में संतुलन जरूरी है।
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फंडामेंटल्स देखें, सिर्फ चार्ट नहीं: जिस कंपनी में निवेश कर रहे हैं, उसकी असली आय, कर्ज, और विकास की दिशा को समझें।
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लिक्विडिटी को मौका मानें, गारंटी नहीं: तरलता से बाजार ऊपर जा सकता है, लेकिन वो स्थायी नहीं होती।
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