चंडीगढ़, 15 जुलाई: सावन माह हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र और पूजनीय महीनों में गिना जाता है। यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है और ऐसा माना जाता है कि इस समय शिव जी धरती पर अपने भक्तों के करीब होते हैं। सावन के सोमवार विशेष रूप से पुण्यदायक माने जाते हैं। इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग पर विशेष पूजन करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
सावन सोमवार व्रत का महत्व
सावन के सोमवार व्रत को लेकर शास्त्रों और पुराणों में विस्तृत चर्चा है। विशेष रूप से:
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कुंवारी कन्याएं इस व्रत को मनचाहा वर पाने के लिए करती हैं।
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विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं।
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पुरुष भी इस व्रत को आध्यात्मिक उन्नति, रोग नाश और धन-समृद्धि के लिए करते हैं।
शिवामूठ पूजा — सरल लेकिन फलदायक उपाय
सावन के सोमवारों में भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक बहुत ही सरल लेकिन प्रभावशाली तरीका है जिसे “शिवामूठ” पूजा कहा जाता है। इसमें हर सोमवार एक विशेष अनाज की एक मुट्ठी शिवलिंग पर अर्पित की जाती है।
यह विधि श्रद्धा और सच्चे मन से की जाए तो भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं और जीवन की तमाम बाधाएं दूर कर देते हैं।
शिवामूठ पूजा विधि: कौन-से सोमवार को क्या चढ़ाएं?
| सावन सोमवार | चढ़ाया जाने वाला अनाज | महत्व |
|---|---|---|
| पहला सोमवार (14 जुलाई 2025) |
1 मुट्ठी साबुत कच्चे चावल | जीवन में स्थिरता और शांति |
| दूसरा सोमवार (21 जुलाई 2025) |
1 मुट्ठी सफेद तिल | पापों का नाश और मानसिक शुद्धि |
| तीसरा सोमवार (28 जुलाई 2025) |
1 मुट्ठी खड़ी मूंग | सेहत और आरोग्य की प्राप्ति |
| चौथा सोमवार (4 अगस्त 2025) |
1 मुट्ठी जौ (बरली) | समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद |
पूजा की विधि (संक्षेप में)
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सवेरा जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
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घर के पास स्थित शिव मंदिर जाएं या घर में शिवलिंग स्थापित कर लें।
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जल, दूध, शहद आदि से रुद्राभिषेक करें।
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फिर उस सोमवार के अनुसार विशेष अनाज की एक मुट्ठी शिवलिंग पर अर्पित करें।
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“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जप करें।
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भस्म व बेलपत्र अर्पित करें, और अंत में आरती करें।
शिवामूठ पूजा के लाभ
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बुरे ग्रहों की दशा शांत होती है।
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नौकरी, विवाह, संतान, धन, स्वास्थ्य जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
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मन को शांति और आत्मिक संतुलन प्राप्त होता है।
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भोलेनाथ की कृपा से रुके हुए काम पूरे होते हैं।
याद रखें:
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अनाज चढ़ाते समय वह साफ, साबुत और बिना टूटा हुआ होना चाहिए।
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पूजा में मन और शरीर की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
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इस पूजा को केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि भक्ति और समर्पण भाव से करें।
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