22 जुलाई को दूसरा मंगला गौरी व्रत, करें ये कार्य और पाएं मां गौरी का आशीर्वाद!

चंडीगढ़, 22 जुलाई: श्रावण मास में हर मंगलवार को मनाया जाने वाला मंगला गौरी व्रत हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और फलदायी उपवास माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से उन विवाहित महिलाओं द्वारा रखा जाता है, जो अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान सुख की कामना करती हैं। नवविवाहिताएं पहले पांच वर्षों तक इस व्रत को विशेष रूप से करती हैं, ताकि उनका दांपत्य जीवन मजबूत, मधुर और सौभाग्यशाली बना रहे।

कब रखा जाएगा दूसरा मंगला गौरी व्रत?

सावन महीने का पहला मंगला गौरी व्रत इस वर्ष 15 जुलाई 2025 (मंगलवार) को रखा गया था। अब इसका दूसरा व्रत 22 जुलाई 2025 (मंगलवार) को होगा। ये दिन उन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है जो माँ गौरी से सौभाग्यवती जीवन का वरदान पाना चाहती हैं।

 व्रत का आध्यात्मिक महत्व

मां गौरी, जिन्हें देवी पार्वती के रूप में भी पूजा जाता है, सौभाग्य, शांति, प्रेम और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। ऐसा विश्वास है कि जो महिलाएं श्रद्धा और निष्ठा से मंगला गौरी व्रत करती हैं, उनके जीवन में:

  • पति का स्वास्थ्य उत्तम रहता है

  • वैवाहिक जीवन में प्रेम बना रहता है

  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है

  • संतान प्राप्ति की संभावनाएं प्रबल होती हैं

 व्रत की तैयारी और नियम

 सोमवार रात्रि की तैयारी:

  • सात्विक भोजन कर लें और रात्रि से ही व्रत का मानसिक संकल्प लें।

  • मंगलवार को प्रातः स्नान कर निर्जल व्रत रखें। कुछ स्थानों पर फलाहार की अनुमति होती है।

 पूजा स्थल की तैयारी:

  • घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करें और साफ वस्त्र बिछाएं।

  • पूजा सामग्री एकत्र करें और मां गौरी की मूर्ति या चित्र को लाल चुनरी से सजाएं।

 आवश्यक पूजा सामग्री:

  • गौरी माता की प्रतिमा या चित्र

  • पांच सुपारी (पंचब्रह्मा का प्रतीक)

  • अक्षत (चावल), हल्दी, कुमकुम, रोली, फूल

  • नैवेद्य (खीर, लड्डू आदि), फल, दीपक, धूप

  • जल से भरा कलश और रोली से बने मांडना चित्र

  • लाल साड़ी या चुनरी (मां को ओढ़ाने हेतु)

  • सौभाग्य सामग्री – चूड़ी, सिंदूर, बिंदी, काजल, महावर

  • गेहूं या चावल से बना चौक

 पूजा विधि:

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  2. संकल्प लें कि आप श्रद्धा पूर्वक मां गौरी का व्रत करेंगी।

  3. चौकी पर मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

  4. उन्हें लाल चुनरी, फूल, सौभाग्य सामग्री अर्पित करें।

  5. सुपारी से पंचब्रह्मा की स्थापना करें।

  6. धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प, फल अर्पित करें।

  7. मंगला गौरी व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।

 व्रत कथा (संक्षेप में):

पुराने समय की बात है, एक नवविवाहिता हर मंगलवार को पूरी श्रद्धा से मंगला गौरी व्रत करती थी। उसकी सास ने यह देखकर एक बार मज़ाक उड़ाया। लेकिन बहू ने बिना विचलित हुए अपना व्रत जारी रखा। कुछ समय पश्चात उसका पति एक बड़ी दुर्घटना से बाल-बाल बच गया। यह देखकर सभी को एहसास हुआ कि यह मां गौरी की कृपा से हुआ है। तब से सभी ने इस व्रत के महत्व को समझा और उसे आदर देना शुरू किया।

 व्रत समापन:

  • पूजा के अंत में आरती करें।

  • कथा के बाद सभी को प्रसाद वितरित करें।

  • संध्या को जल या फल ग्रहण कर व्रत खोलें।