राहुल गांधी और खरगे ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र: जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग!

चंडीगढ़, 16 जुलाई: कांग्रेस पार्टी के दो प्रमुख नेता — लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे — ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त पत्र लिखकर जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने और लद्दाख को भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग की है। यह पत्र देश की संवैधानिक संरचना और संघीय ढांचे को मज़बूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहल मानी जा रही है।

पत्र की प्रमुख मांगें क्या हैं?

  1. जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा:
    राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया है कि केंद्र शासित प्रदेश बने जम्मू-कश्मीर को पुनः पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। नेताओं ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री के पूर्व बयानों का हवाला देते हुए यह बात कही कि आपने खुद कई मौकों पर राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था।

    • 19 मई 2024 को भुवनेश्वर में एक साक्षात्कार के दौरान पीएम मोदी ने कहा था:
      “राज्य का दर्जा बहाल करना हमारा वादा है और हम इस पर कायम हैं।”

    • 19 सितंबर 2024 को श्रीनगर में एक जनसभा में भी प्रधानमंत्री ने इसी आशय की बात दोहराई थी।

    • इसके अलावा, अनुच्छेद 370 से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान भी केंद्र सरकार ने अदालत में यह भरोसा दिलाया था कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा जल्द वापस मिलेगा।

  2. लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना:
    पत्र में दोनों वरिष्ठ नेताओं ने यह भी उल्लेख किया है कि लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल किया जाना आवश्यक है ताकि वहां की स्थानीय संस्कृति, परंपराएं, ज़मीन, पहचान और राजनीतिक अधिकार सुरक्षित रह सकें। यह कदम लद्दाख के लोगों की दीर्घकालिक मांगों और भावनात्मक आकांक्षाओं को सम्मान देने का प्रतीक भी होगा।

    छठी अनुसूची विशेष रूप से आदिवासी और सांस्कृतिक रूप से विशिष्ट क्षेत्रों को स्वायत्तता और अधिकार देने के लिए बनाई गई है। इसका प्रावधान लद्दाख जैसे क्षेत्र की विशेष भौगोलिक और जनजातीय संरचना को देखते हुए प्रासंगिक माना जा रहा है।

इस पत्र के राजनीतिक मायने

यह पत्र ऐसे समय में लिखा गया है जब केंद्र सरकार और भाजपा जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया की बहाली की बात कर रही है, और जल्द चुनाव की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं। ऐसे में कांग्रेस द्वारा उठाया गया यह कदम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की जनता के विश्वास को जीतने की दिशा में एक रणनीतिक पहल मानी जा रही है।

कांग्रेस यह संदेश देना चाह रही है कि वह न केवल संवैधानिक मूल्यों की पक्षधर है, बल्कि क्षेत्रीय आकांक्षाओं को भी केंद्र सरकार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रही है।