चंडीगढ़, 20 मई: सोमवार की शाम लखनऊ के हजारों बैंक ग्राहकों के लिए एक बड़े झटके की खबर लेकर आई। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने HCBL को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। आरबीआई द्वारा उठाया गया यह कदम बैंक की वित्तीय स्थिति के निरंतर गिरते स्तर और उसके भविष्य की संभावनाओं के पूरी तरह खत्म हो जाने के कारण उठाया गया है।
इस फैसले के बाद HCBL बैंक का सारा संचालन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है और अब ग्राहक न तो बैंक में पैसे जमा कर पाएंगे और न ही अपने खातों से निकासी कर सकेंगे। इस निर्णय से लखनऊ और आसपास के हजारों खाताधारकों में घबराहट फैल गई है।
क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला?
भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि बैंक न तो पर्याप्त पूंजी जुटा पा रहा था और न ही उसके पास लाभ कमाने की कोई संभावित योजना या रास्ता था। बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 के अंतर्गत जो नियम और शर्तें एक बैंक को बनाए रखने के लिए जरूरी होती हैं, उन सभी का उल्लंघन HCBL बैंक द्वारा लगातार किया गया।
आरबीआई का यह भी कहना है कि मौजूदा हालत में इस बैंक को चालू रखना न तो खाताधारकों के हित में है और न ही देश की बैंकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए उचित है। इसी वजह से बैंक के आगे संचालन पर पूर्ण विराम लगाना जरूरी हो गया।
खाताधारकों का पैसा क्या डूब गया है? जानिए सच्चाई
लाइसेंस रद्द होने के बाद ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि उनका जमा पैसा अब क्या सुरक्षित रहेगा या नहीं।
इस संदर्भ में डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) की भूमिका अहम हो जाती है। भारत सरकार के इस निकाय के अनुसार, एक ग्राहक को उसकी जमा राशि में से अधिकतम ₹5 लाख तक की राशि बीमा कवरेज के तहत मिल सकती है। यानी अगर किसी ग्राहक की कुल जमा राशि ₹5 लाख या उससे कम है, तो वह पूरी रकम वापस पाने का हकदार है।
HCBL बैंक के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 98.69% खाताधारक अपनी पूरी जमा राशि बीमा कवरेज के तहत वापस पा सकेंगे। अब तक DICGC द्वारा ₹21.24 करोड़ रुपये की बीमित राशि का भुगतान किया जा चुका है। शेष ग्राहकों को भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भुगतान किया जाएगा।
बैंक के बंद होने के बाद क्या होंगे अगला कदम?
भारतीय रिजर्व बैंक ने उत्तर प्रदेश के को-ऑपरेटिव कमिश्नर और बैंक के रजिस्ट्रार को निर्देश दिए हैं कि HCBL को-ऑपरेटिव बैंक को पूरी तरह से बंद किया जाए और एक लिक्विडेटर (परिसमापक) की नियुक्ति की जाए।
यह परिसमापक बैंक की सारी संपत्तियों और देनदारियों का लेखा-जोखा संभालेगा, सभी लेनदेन बंद करेगा और बैंक को कानूनी रूप से समाप्त करने की प्रक्रिया पूरी करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि बैंक की बची हुई संपत्तियों का उपयोग करके ग्राहकों की राशि का अधिकतम भुगतान किया जा सके।
पहले भी रद्द हो चुके हैं ऐसे बैंक लाइसेंस
HCBL को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द होना कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी रिज़र्व बैंक ने कई सहकारी बैंकों के लाइसेंस रद्द किए हैं।
अप्रैल 2025 में ही, गुजरात के अहमदाबाद में कलर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक, महाराष्ट्र के अजंता अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक और पंजाब के इंपीरियल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक जैसे संस्थानों पर भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। ये सभी बैंक भी वित्तीय अव्यवस्थाओं के कारण ग्राहकों के लिए खतरा बन चुके थे।
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