रानी लक्ष्मीबाई की जयंती हर वर्ष 19 नवंबर को मनाई जाती है, भारत के इतिहास में अगर किसी स्त्री ने साहस, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की लौ को अमर कर दिया तो वह हैं झांसी की वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई। । यह वह दिन है जब भारत उनकी वीरता को याद करता है और हर महिला उनके जीवन से नई प्रेरणा पाती है
रानी लक्ष्मीबाई ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपने अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम का अद्वितीय उदाहरण स्थापित किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज बुधवार को रानी लक्ष्मीबाई को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। पीएम मोदी ने कहा कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनकी वीरता और पराक्रम की गाथा आज भी भारतीयों में उत्साह और जोश भरती है। उन्होंने कहा,” कृतज्ञ राष्ट्र मातृभूमि के सम्मान की रक्षा के लिए उनके बलिदान और संघर्ष को कभी नहीं भूल सकता।” देश आज मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वालीं, नारी शक्ति और वीरता की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई की जयंती मना रहा है। इस मौके पर पीएम मोदी समेत देश के प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

PM मोदी ने X पर दिया आदरपूर्ण श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “मां भारती की अमर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। आजादी के पहले संग्राम में उनकी वीरता और पराक्रम की कहानी आज भी देशवासियों को जोश और जुनून से भर देती है। मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए उनके त्याग और संघर्ष को कृतज्ञ राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता।”
महारानी लक्ष्मीबाई की जीवन परिचय
9 नवंबर 1828 को काशी में जन्मी मणिकर्णिका (मनु) बचपन से ही घुड़सवारी, तलवारबाज़ी और युद्धकला में निपुण थीं। एक रूढ़िवादी समाज में उन्होंने वह किया जिसे लड़कियां करने की अनुमति तक नहीं पाती थीं। उन्होंने अपने जीवन को बंधनों के बजाय स्वतंत्रता की उड़ान दी। विवाह के बाद वे झांसी की रानी बनीं।
विवाह के बाद वे झांसी की रानी लक्ष्मीबाई बनीं उनका प्रसिद्ध नारा “मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी” भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा बन गया।
1857 के विद्रोह के दौरान महारानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरीं। अपने दत्तक पुत्र दामोदर राव को सुरक्षित रखते हुए उन्होंने अंग्रेजी सेना से युद्ध किया था। उन्होंने महिलाओं, किसानों, सैनिकों और आम जनता को संगठित कर स्वतंत्रता की ज्वाला फैला दी। अंग्रेजों ने जब झांसी हड़पने की कोशिश की, तो उन्होंने साम्राज्य की नींव हिला देने वाला जवाब दिया कि “मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी”

झांसी की रक्षा के लिए उन्होंने जिस अदम्य साहस से युद्ध किया, वह आज भी दुनिया के इतिहास में उदाहरण माना जाता है।
अमित शाह ने X पर पोस्ट किया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “मातृभूमि की रक्षा को जीवन का सर्वोच्च ध्येय बनाने वालीं रानी लक्ष्मीबाई जी ने अपनी दूरदृष्टि से सन् 1857 की क्रांति को आकार देने में अविस्मरणीय भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी वीरता, अद्भुत शौर्य और पराक्रम से अंग्रेजों की कूटनीति से लेकर युद्ध के मैदानों तक दांत खट्टे किए। हर देशवासी को उनकी वीरगाथा अवश्य पढ़नी चाहिए और मातृभूमि के प्रति त्याग व समर्पण की प्रेरणा लेनी चाहिए। महान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जी को उनकी जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से वंदन करता हूं।”
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