अयोध्या: 500 वर्षों का इंतजार करने के बाद सिर्फ पांच वर्ष में भव्य मंदिर बनकर तैयार है।रामलला की प्राण प्रतिष्ठआ होने के 1 साल 9 महीनें बाद अयोध्या में एक बार फिर बड़ा आयोजन होने जा रहा है। बतादें 25 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण करेंगे राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन भी पीएम मोदी ने ही पांच अगस्त 2020 को किया था। इसके बाद भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को की थी। अब जब पूरी तरह से मंदिर बनकर तैयार हो गया है, तो मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण भी पीएम मोदी ही करेंगे। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहेंगे।
25 नवंबर को सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12.30 तक नही कर सकेगे दर्शन
राम मंदिर के केसरिया रंग की खास ध्वजा पर सूर्य़ ,ऊँ और कोविदार के प्रतीक बने हुए है। राम मंदिर के 161 फुट ऊंचे शिखर पर 41 फुट लंबी और 11 फुट चौड़ी पताका फराएगी। यह ध्वज 60 KM/ घंटा रफ्तार की तेज हवाओं को झेल सकेगा। आंधी तूफान में उसे कोई नुकसान नही होगा। इसके साथ ही यह ध्वज 360 डिग्री पर घूम भी सकेगा 21 नवंबर से आयोजन शुरु होंगे. मुख्य आयोजन 25 नवंबर को सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12.30 तरक चलेगा। इस दौरान लोग दर्शन नही कर पाएंगे।
नागर शैली में पत्थरों से बना मंदिर
समूचा मंदिर पत्थरों का नागर शैली में बना है। इसका निर्माण अब पूरा हो चुका है। भूतल पर रामलला और प्रथम तल पर राम परिवार विराजित हैं। कलश और ध्वज दंड स्थापित हो चुके हैं। मंदिर के चारों ओर 800 मीटर आयताकार पत्थरों का परकोटा तैयार है। परकोटा 14 फीट चौड़ा है।
कलश और ध्वज दंड स्थापित
मंदिर के कोनों पर शिवलिंग, गणपति, सूर्य देव और मां भगवती विराजमान हैं। दक्षिणी भुजा में हनुमान जी, उत्तरी भुजा में माता अन्नपूर्णा के मंदिर बने हैं। इन पर भी कलश और ध्वज दंड लग चुके हैं। इन मंदिरों में प्रतिमाओं की पूजा हो रही है। इनकी प्राण प्रतिष्ठा जून माह में हो गई थी। राम मंदिर के दक्षिणी और पश्चिमी कोने पर लक्ष्मण का मंदिर बनकर तैयार है। इसका नाम शेषावतार है। वही इस बार 25 नवंबर को देशभऱ में सेलिब्रिटी नही बल्कि अयोध्या और आसपास के जिलों से श्रद्दालु आमंत्रित किए जा रहें ।
तुलसीदास का भी मंदिर तैयार
सप्त मंडप यानी महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषाद राज, माता शबरी और माता अहिल्या के भी मंदिर बन चुके हैं। तुलसी दास जी का भी मंदिर बनकर तैयार है। सभी प्रतिमाएं स्थापित हो चुकी हैं। कुबेर टीला पर जटायू और अंगद टीला पर गिलहरी की स्थापना हो चुकी है।
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