Radhika Yadav Gurugram Case: टेनिस कोर्ट से किचन तक, गोलियों की गूंज और राधिका की अधूरी कहानी?

चंडीगढ़, 11 जुलाई: हरियाणा की होनहार टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव के साथ जो हुआ, वह न केवल समाज को झकझोर देने वाला है, बल्कि सोचने पर मजबूर भी करता है कि जब अपने ही सपनों को कुचल दें तो उम्मीद की जगह कौन लेता है?

देश के लिए 18 गोल्ड मेडल जीत चुकी राधिका की जिंदगी गुरुवार (10 जुलाई) को एक खौफनाक मोड़ पर थम गई, जब उसके अपने पिता दीपक यादव ने उसे गोलियों से भून दिया। वह लड़की, जो कभी अपने पिता की शान हुआ करती थी, अब उसी के हाथों मौत के घाट उतार दी गई। राधिका उस वक्त किचन में खाना बना रही थी।

क्या है पूरा मामला?

घटना गुरुग्राम के सेक्टर-56 क्षेत्र की है। गुरुवार दोपहर लगभग 1 बजे के आसपास जब राधिका अपने घर में किचन में खाना बना रही थी, तब उसके पिता दीपक यादव ने पीछे से आकर लाइसेंसी पिस्टल से उस पर तीन गोलियां चला दीं। राधिका की मां उस वक्त घर पर ही मौजूद थीं।

गोली चलने की आवाज सुनकर नीचे मौजूद राधिका के चाचा का परिवार और भाई दौड़े। फौरन उसे गंभीर हालत में मेरिंगो एशिया अस्पताल ले जाया गया, लेकिन दोपहर बाद उसकी मौत हो गई।

क्यों की पिता ने अपनी ही बेटी की हत्या?

इस सवाल का जवाब सुनकर इंसानियत शर्मसार हो जाती है। दीपक यादव पर आरोप है कि उसे समाज में लोग ताना मारते थे कि वह बेटी की कमाई खाता है। यह बात उसकी झूठी मर्दानगी और तथाकथित इज्जत को इतनी चुभती थी कि उसने अपने ही खून का खून कर डाला।

दीपक पिछले कई हफ्तों से राधिका पर दबाव बना रहा था कि वह अपनी टेनिस अकादमी बंद कर दे, और घर बैठ जाए। लेकिन राधिका अपने सपनों को लेकर अडिग थी। वह अकादमी चलाना चाहती थी, बच्चों को ट्रेनिंग देना चाहती थी।

यही बना दोनों के बीच तकरार का कारण। 15 दिनों से लगातार विवाद चल रहा था और अंततः दीपक ने अपने गुस्से पर काबू खो दिया और बेटी की जान ले ली।

दीपक यादव का स्वभाव कैसा था?

पड़ोसियों और परिवारजनों के मुताबिक, दीपक यादव बेहद गुस्सैल स्वभाव का व्यक्ति था। किसी भी बात पर जल्द आपा खो देता था। जब से लोगों ने उसे ताने देना शुरू किया कि वह बेटी की कमाई पर आश्रित है, तब से वह और अधिक चिड़चिड़ा हो गया था।

पुलिस पूछताछ में उसने कहा:

“बेटी पर गर्व था, लेकिन लोग जो कहते थे, वो बर्दाश्त नहीं हो रहा था।”

घटना के वक्त घर में कौन-कौन था?

इस दर्दनाक हादसे के वक्त घर में कई सदस्य मौजूद थे:

  • राधिका की मां, जो उसी फ्लोर पर थीं।

  • भाई, जो गोली चलने पर दौड़कर आया।

  • नीचे फ्लोर पर चाचा कुलदीप और उनका परिवार।

लेकिन अफसोस कि किसी को यह अंदेशा तक नहीं था कि दीपक इस हद तक जा सकता है।

आरोपी पिता गिरफ्तार, पिस्टल जब्त

घटना की सूचना मिलते ही सेक्टर-56 थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दीपक यादव को उसी के घर से गिरफ्तार कर लिया। हत्या में उपयोग की गई लाइसेंसी पिस्टल भी पुलिस ने बरामद कर ली है। अब उससे हत्या की वजह और घटना की योजना को लेकर विस्तृत पूछताछ की जा रही है।

राधिका यादव कौन थी?

  • राधिका नेशनल लेवल टेनिस खिलाड़ी थीं।

  • उन्होंने अब तक 18 गोल्ड मेडल अपने नाम किए थे।

  • वह खेल के साथ-साथ एक प्रोफेशनल टेनिस कोचिंग अकादमी भी चला रही थीं, जहां दर्जनों बच्चे ट्रेनिंग लेते थे।

  • उनका सपना था कि वह भारत को ओलंपिक में भी रिप्रेजेंट करें।

राधिका की हत्या सिर्फ एक बेटी की मौत नहीं, बल्कि उस मानसिकता की भी हार है जो मानती है कि बेटियां केवल सम्मान की वस्तु हैं, उनका सफल होना पुरुष की सत्ता को चुनौती देता है।

यह एक बार फिर दिखाता है कि औरत जब आत्मनिर्भर होती है, तो पितृसत्तात्मक समाज का अहंकार डगमगाने लगता है।