“वकीलों के हितों की रक्षा करेगी पंजाब सरकार”..CM मान

चंडीगढ़, 11 फरवरी:  ग्राम न्यायालय के लिए केंद्र की ओर से किए जा रहे दबाव के खिलाफ स्पष्ट लकीर खींचते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इसे गैर-व्यवहारिक और कानूनी समुदाय के हितों के विपरीत बताया तथा कहा कि सरकार राज्य में इस मुद्दे पर निर्णायक कदम उठाने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने इस मामले की गहन जांच के लिए कानूनी विशेषज्ञों की कमेटी गठित करने का ऐलान करते हुए कहा कि वे इसे केंद्र सरकार के समक्ष उचित स्तर पर उठाएंगे।

इस मुद्दे को संस्थागत अखंडता और लोगों के विश्वास से संबंधित बताते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि न्यायपालिका में कानून का राज और नैतिक मानदंड सर्वोच्च रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार वकीलों के हितों की रक्षा के लिए कोई कसर ताकत नहीं छोड़ेगी।

म्यूनिसिपल भवन में 65 बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पूरे राज्य के लोगों की 20 किलोमीटर के दायरे में अदालतों तक पहुंच है, जिस कारण यह संकल्प पंजाब में व्यावहारिक रूप से लागू नहीं हो सकता। वकील पहले ही केंद्र के इस कदम के खिलाफ डटे हुए हैं क्योंकि इससे राज्य सरकारों को कानूनी तौर पर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पंजाब में इस संकल्प को बंद करने के सभी तरीके खोजे जाएंगे।”

मुख्यमंत्री ने ऐलान किया, “पंजाब सरकार इस संबंध में सभी पहलुओं की पड़ताल करने के लिए कानूनी विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन करेगी। मैं इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उचित मंचों पर भी उठाऊंगा।”

अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार वकील समुदाय के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस नेक कार्य के लिए कोई कसर ताकत नहीं छोड़ी जाएगी। बार एसोसिएशनों के योगदान को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “बार एसोसिएशनों ने देश में कानूनी प्रणाली के विकास में प्रभावशाली ढंग से योगदान देने के लिए हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और समाज की बेहतरी के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। भारत एक संप्रभु समाजवादी गणराज्य है, जिसमें संसदीय प्रणाली है और इसे यह गौरव प्राप्त है कि वह विश्व में सबसे बड़ी लोकतांत्रिक प्रणाली है। न्याय, आजादी, समानता और भाईचारा चार विशेषताएं हमारे संविधान द्वारा हर नागरिक के लिए सुरक्षित हैं