President द्रौपदी मुर्मु ने गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस पर दी श्रद्धांजलि

दिल्ली : गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस भारतीय इतिहास में धार्मिक स्वतंत्रता और अटूट साहस के रूप में याद किया जाता है. हर साल 24 नवंबर को यह पवित्र दिन मनाया जाता है. गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान दिवस सिख समुदाय ही नहीं बल्कि पूरे भारत में बड़े ही श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है। यह दिन गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान और शिक्षाओं को याद करने का है।इस दिन लोग गुरु तेग बहादुर जी की शहादत को याद करते हैं और उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं का स्मरण करते हैं। ये दिन सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर जी के सर्वोच्च त्याग और आदर्शों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का प्रतीक है।

दिल्ली सरकार ने 25 नवंबर यानी  मंगलवार को गुरु तेग बहादुर जी के 350 वें शहीदी दिवस पर  सार्वजनिक अवकाश  घोषित किया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समेत कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

सिख गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू समेत कई प्रमुख नेताओं ने उनके बलि/दान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X  पर लिखा, “श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। धर्म, न्याय और दृढ़ता के मार्ग पर चलने का उनका संदेश संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है।” आस्था और मानवाधिकार की रक्षा के लिए किए गए उनके बलिदान को याद करते हुए राष्ट्रपति ने लिखा, “हमें हर परिस्थिति का सामना साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ करने की शक्ति मिलती है। आइए, हम उनकी शिक्षाओं को आत्मसात कर सशक्त और विकसित भारत के निर्माण के लिए निरंतर आगे बढ़ते रहें।”

जाने गुरु तेग  बहादुर का बलिदान दिवस क्यों मनाया जाता है?

गुरु तेग बहादुर जी ने साल 1675 में दिल्ली में शहादत प्राप्त की थी। उन्होंने मुगल सम्राट औरंगजेब के धार्मिक उत्पीड़न का खुलकर विरोध किया था। औरंगजेब ने जब कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार करने शुरू किए तब गुरु तेग बहादुर जी ने उनकी रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था। देशभर में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर आज उनके अद्वितीय बलिदान और मानवता की रक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी गुरु जी की शिक्षाओं और साहस को याद किया और उनहें श्रद्दांजली अर्पित की।