चंडीगढ़, 16 जुलाई: देश के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 को लागू किए गए आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सूचना, जनसम्पर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग, हरियाणा द्वारा एक विशेष जागरूकता प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य न केवल उस दौर की घटनाओं की जानकारी देना है, बल्कि उन लोकतंत्र सेनानियों की वीरगाथा को भी सामने लाना है जिन्होंने उस कठिन समय में जनतंत्र की रक्षा के लिए अपनी स्वतंत्रता तक दांव पर लगा दी थी।
प्रदर्शनी का उद्घाटन पंचकूला की उपायुक्त श्रीमती मोनिका गुप्ता द्वारा किया गया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि यह प्रदर्शनी ना केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज है, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सीख भी है कि लोकतंत्र की रक्षा केवल संविधान में लिखे शब्दों से नहीं होती, बल्कि जागरूक नागरिकों और साहसी नेतृत्व के दृढ़ संकल्प से होती है।
क्या है इस प्रदर्शनी की विशेषता?
लघु सचिवालय परिसर में आयोजित इस प्रदर्शनी में आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं, नागरिकों के अधिकारों के हनन, पत्रकारों और नेताओं की गिरफ्तारी, सेंसरशिप, और देशभर में छाए भय के वातावरण को दस्तावेजों, तस्वीरों, अख़बारों की कतरनों, तथा उस समय के सत्य घटनाक्रमों के माध्यम से विस्तारपूर्वक दर्शाया गया है।
साथ ही यह भी बताया गया है कि कैसे अनेक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए अपनी आज़ादी तक को त्याग दिया। उन सभी लोकतंत्र प्रहरियों की जीवंत कहानियां प्रदर्शनी का सबसे भावनात्मक पक्ष बनकर सामने आती हैं।
उपायुक्त मोनिका गुप्ता ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि आपातकाल न केवल एक राजनीतिक निर्णय था, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की आत्मा पर किया गया एक गहरा प्रहार था। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी यह दिखाने का एक प्रयास है कि कैसे भारत की प्राचीन लोकतांत्रिक परंपराएं जन भागीदारी और लोक-हित के विचार पर आधारित रही हैं। इसमें दिखाया गया है कि चाहे वह ग्रामीण पंचायत हो या संसद, भारत का लोकतंत्र हमेशा जन-आधारित रहा है।
तीन स्थानों पर एक साथ प्रदर्शनी
जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी श्री कुलदीप सिंह बांगड़ ने बताया कि यह प्रदर्शनी सिर्फ लघु सचिवालय तक सीमित नहीं है। शहरी क्षेत्र में सेक्टर 1 स्थित राजकीय महाविद्यालय, पंचकूला और ग्रामीण क्षेत्र में बरवाला स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भी इस प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। बरवाला कॉलेज में प्रदर्शनी का उद्घाटन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिवाच ने किया।
यह प्रदर्शनियां अगले तीन दिनों तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेंगी, जहां वे जाकर आपातकाल के उस काले दौर से संबंधित जानकारियों को प्रत्यक्ष रूप से देख और समझ सकेंगे।
जनता ने ली भागीदारी, लोकतंत्र सेनानियों को किया नमन
उद्घाटन के पश्चात सचिवालय में उपस्थित जनसमूह ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और आपातकाल की भयावहता को प्रत्यक्ष अनुभव किया। कई वरिष्ठ नागरिकों ने उस दौर की स्मृतियां साझा कीं और बताया कि कैसे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ था। युवा पीढ़ी के लिए यह प्रदर्शनी एक जीता-जागता इतिहास बनकर उभरी।
प्रदर्शनी के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया गया कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र की कीमत चुकानी पड़ती है, और इसके लिए नागरिकों को सतर्क और जागरूक रहना आवश्यक है।
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