वन नेशन-वन एग्रीकल्चर-वन टीम: केंद्र की नई सोच से कृषि होगी एकजुट!

चंडीगढ़, 18 जून: भारत सरकार के केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि यह एक जन-आंदोलन है, जो देश के कोने-कोने में किसानों की समृद्धि और उन्नत खेती की दिशा में निरंतर आगे बढ़ेगा। इस अभियान की सफलता का मूल्यांकन करते हुए श्री चौहान ने ऐलान किया कि यह यात्रा अब थमेगी नहीं, बल्कि और व्यापक रूप से पूरे देश में फैलाई जाएगी।

श्री चौहान ने जानकारी दी कि इस अभियान के अंतर्गत देशभर के 1.42 लाख से अधिक गांवों में 1.34 करोड़ से ज्यादा किसानों से सीधा संवाद किया गया है। इस कार्य को 2170 वैज्ञानिक टीमों ने अंजाम दिया, जिन्होंने खेतों में जाकर किसानों से बातचीत की, उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान सुझाए। ये टीमें वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, अधिकारी और अन्य संबंधित लोगों से बनी थीं।

उन्होंने कहा कि अब इस अभियान को और मजबूत करने के लिए हर जिले में “केवीके” (कृषि विज्ञान केंद्र) को एक नोडल एजेंसी के रूप में गठित किया जाएगा। हर केवीके की एकरूप कार्यप्रणाली होगी और ये किसान हित में समन्वय स्थापित करेंगी। हर जिले का केवीके अब सप्ताह में कम से कम तीन दिन खेतों में जाकर किसानों के साथ संवाद करेगा, ताकि उनकी जमीनी समस्याओं को नजदीक से समझा जा सके।

श्री चौहान ने यह भी घोषणा की कि वे स्वयं भी हर सप्ताह दो दिन खेतों में जाकर किसानों से मिलेंगे, उनकी बातें सुनेंगे और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे। उन्होंने अफसरों से भी आग्रह किया कि वे केवल दफ्तरों में बैठकर योजनाओं को न चलाएं, बल्कि खेतों में जाकर वास्तविक स्थिति का जायजा लें

उन्होंने कहा कि “केवल बैठकों और रिपोर्टों से नहीं, बल्कि खेतों की मिट्टी और किसानों के चेहरों को पढ़कर ही असली कृषि नीति बन सकती है।

समस्याओं पर सीधी बात

अभियान के दौरान दो प्रमुख समस्याएं सामने आईं – अमानक बीज और अमानक कीटनाशक। किसानों से मिली शिकायतों के आधार पर सरकार ने यह तय किया है कि अब सीड एक्ट (बीज अधिनियम) को और सख्त बनाया जाएगा, ताकि गुणवत्तापूर्ण बीज ही किसानों तक पहुंचे। इसके साथ ही कीटनाशकों की गुणवत्ता और मानक सुनिश्चित करने के लिए भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।

अनुसंधान और नवाचार: किसान भी वैज्ञानिक

अभियान के दौरान यह बात उभर कर सामने आई कि कई किसान स्वयं भी वैज्ञानिक की तरह नवाचार कर रहे हैं। वे अपने स्थानीय अनुभव और पर्यावरण की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नए तरीके अपना रहे हैं, जिनसे अच्छा उत्पादन संभव हो रहा है। कई बार वैज्ञानिक भी इन किसानों के अभिनव प्रयोग देखकर चौंक जाते हैं।

इसलिए श्री चौहान ने कहा कि अब अनुसंधान की दिशा केवल प्रयोगशालाओं में नहीं तय होगी, बल्कि जमीन से जुड़ी समस्याओं के आधार पर भी अनुसंधान के विषय निर्धारित किए जाएंगे। किसानों के सुझावों और अनुभवों को भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया जाएगा।

एकजुटता से मिलेगा लक्ष्य

उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि देश की सभी कृषि संस्थाएं – चाहे वे आईसीएआर हों, कृषि विश्वविद्यालय हों, कृषि विभाग हों या राज्य सरकारें – सबको एक दिशा में समन्वय के साथ काम करना होगा। इसी सोच के तहत “वन नेशन – वन एग्रीकल्चर – वन टीम” की कल्पना की गई है, जिससे किसान, वैज्ञानिक और नीति निर्माता एक साथ मिलकर काम करें।

फसलों पर विशेष ध्यान

आगे की योजनाओं में फसल-आधारित मिशन भी शामिल किए गए हैं। जैसे:

  • सोयाबीन मिशन पर 26 जून को इंदौर में विशेष बैठक होगी

  • इसके बाद कपास मिशन, गन्ना मिशन, दलहन और तिलहन मिशन पर काम किया जाएगा

इन मिशनों के माध्यम से हर फसल पर विशिष्ट रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि उसका उत्पादन बढ़े और किसान को लाभ अधिक मिले।

आकांक्षी जिलों और सीमावर्ती गांवों पर विशेष फोकस

श्री चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 112 आकांक्षी जिलों और सीमावर्ती इलाकों के गांवों में भी विशेष ध्यान दिया गया है। 6800 गांवों में वैज्ञानिक टीमों ने पहुंचकर 15 लाख से ज्यादा किसानों से संवाद किया। वहीं, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत दुर्गम इलाकों तक वैज्ञानिक पहुंच सके।

किसान चौपाल: अभियान की आत्मा

इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि रही ‘किसान चौपाल’, जहां गांवों में बैठकों के माध्यम से वैज्ञानिकों और किसानों के बीच ज्ञान और अनुभव का सीधा आदान-प्रदान हुआ। मिट्टी की पोषणता, सही किस्म के बीज, मौसम की स्थिति और खेती की योजनाएं – इन सभी विषयों पर स्थानीय संदर्भों में चर्चा की गई।

किसानों के सुझाव होंगे नीति का हिस्सा

श्री चौहान ने कहा कि किसानों के दिए गए सुझावों को योजनाएं बनाते समय प्राथमिकता दी जाएगी। चाहे वह चारे की नीति हो, जैविक खेती का प्रमाणन हो या एफपीओ को व्यवहारिक बनाने के उपाय – सरकार इन बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करेगी।

अभियान के अगले चरण में:

  • रबी फसलों के लिए फिर से अभियान चलाया जाएगा

  • राज्यवार नोडल अफसर नियुक्त किए जाएंगे जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से राज्य सरकारों को सलाह देंगे

  • समन्वित नीति निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे