चंडीगढ़, 18 जुलाई: देश की राजधानी में बुधवार शाम कुछ ऐसा नज़ारा देखने को मिला जो आमतौर पर फिल्मों में ही देखने को मिलता है। शहर के बीचोबीच स्थित एक प्रतिष्ठित पांच सितारा होटल की छत पर अचानक हेलिकॉप्टर की गूंज सुनाई दी और देखते ही देखते दर्जनों NSG कमांडो हवा से रस्सियों के सहारे नीचे उतरने लगे। लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले यह पूरा ऑपरेशन एक्शन मोड में था।
लेकिन घबराइए नहीं, यह कोई असली आतंकी हमला नहीं था। दरअसल, यह सब एक विशाल मॉक ड्रिल का हिस्सा था, जो राजधानी दिल्ली को किसी भी आतंकी खतरे से निपटने के लिए तैयार करने के मकसद से आयोजित की गई थी।
क्या था पूरा मामला?
दिल्ली के जनपथ स्थित लग्ज़री होटल ‘द क्लेरिजेस’ में यह मॉक ड्रिल देर शाम शुरू की गई। इस अभ्यास की शुरुआत एक काल्पनिक बम धमाके की सूचना के साथ हुई। सूचना मिलते ही NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स), दिल्ली पुलिस और स्पेशल सेल की टीमें तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं। देखते ही देखते होटल के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना दिया गया और ऑपरेशन की शुरुआत हो गई।
आसमान से आई कार्रवाई: चॉपर एंट्री बनी ड्रिल का हाईलाइट
इस मॉक ड्रिल की सबसे रोमांचक और ध्यान खींचने वाली बात थी NSG कमांडोज़ की हवाई एंट्री। हेलिकॉप्टर हवा में मंडरा रहा था और उसी दौरान विशेष कमांडो उसके नीचे लटकती रस्सियों के सहारे सीधे होटल की छत पर उतरे।
इस दृश्य ने यह साफ कर दिया कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां हर संभावित स्थिति के लिए कितनी सजग, आधुनिक और तेज़-तर्रार हैं। हेलिकॉप्टर ने लैंड नहीं किया, जिससे पता चलता है कि रियल-टाइम हाई रिस्क मिशन की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही।
क्या था ड्रिल का उद्देश्य?
यह केवल एक्शन दिखाने का अभ्यास नहीं था। इस मॉक ड्रिल के ज़रिए कई अहम चीज़ों की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की गई, जैसे:
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घायलों को सुरक्षित बाहर निकालना
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संदिग्धों की पहचान और जांच
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पूरे इलाके को जल्दी खाली कराना
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एजेंसियों के बीच तालमेल और त्वरित निर्णय क्षमता
इस अभ्यास का मकसद था कि अगर वास्तव में ऐसा कोई आतंकी हमला हो, तो किस तरह सभी सुरक्षा एजेंसियां मिलकर एकजुट होकर कार्य कर सकती हैं और बिना समय गंवाए प्रतिक्रिया दे सकती हैं।
राजधानी में कई इलाकों में जारी रहेगा अभ्यास
यह मॉक ड्रिल सिर्फ एक होटल तक सीमित नहीं रही। 17 जुलाई को यह अभ्यास सुबह कश्मीरी गेट, शाम को द क्लेरिजेस होटल, और रात करीब 9 बजे हिंदू कॉलेज में किया गया।
सरकार ने इस तरह की ड्रिल्स को और व्यापक रूप में आयोजित करने का फैसला किया है। 18 जुलाई तक दिल्ली के 10 अलग-अलग इलाकों में ये अभ्यास किए जा रहे हैं।
आम जनता से सहयोग की अपील
इस तरह के अभ्यासों के दौरान आम नागरिकों को घबराने की ज़रूरत नहीं है। सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि कहीं ऐसा ऑपरेशन दिखाई दे, तो कोई अफवाह न फैलाएं और न ही कोई बाधा उत्पन्न करें। यह सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है।
क्यों जरूरी है ऐसी ड्रिल?
दिल्ली एक बड़ा, भीड़भाड़ वाला और राष्ट्रीय महत्व का शहर है। यहां हर समय आतंकी खतरे की संभावना को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। ऐसे में समय-समय पर इस तरह की मॉक ड्रिल्स होना बेहद ज़रूरी है ताकि:
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सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों का मूल्यांकन हो
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ज़मीनी स्तर पर तालमेल देखा जा सके
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रेस्पॉन्स टाइम को तेज़ किया जा सके
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आम लोग भी सतर्क और जागरूक रहें
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