शनिवार का दिन शनि देव और शनि ग्रह को समर्पित है. इस दिन शनि देव की पूजा करने से जीवन की सारी बाधाएं और कष्ट दूर हो जाते हैं. शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है शनिदेव कर्मों के अनुसार फल देते है बुरे कर्म करने वालो को बुरा फल देते है और अच्छे कर्म करने वाले को अच्छा फल देते है। बुरे कर्म में शनिदेव जीवन भर कष्ट देते है माना जाता है जो व्यक्ति शनिवार के दिन भगवान शनिदेव की पूजा करता है उस पर शनिदेव प्रसन्न होते है। शनिदेव के प्रभाव से कोई भी बच नही सकता चाहे वो देव हो या मनुष्य हो। लेकिन क्या आपको पता है शनिदेव के गुरु भी है चलिए हम आपको बताते है शनिदेव के गुरु कौन है तो शनिदेव के गुरु देवाधिदेव भगवान शंकर है।
इससे संबधित एक कथा है आप भी जानिए यह कथा-
ज्योतिषाचार्य के मुताबित , भगवान शिव, शनिदेव के गुरु हैं. शिव ने ही शनि को न्यायाधीश का पद सौंपा था, जिसके फलस्वरूप शनि देव मनुष्य/देव/पशु सभी को कर्मों के अनुसार फल देते हैं. इसलिए श्रावण के महीने में जो भी भगवान शिव के साथ साथ शनि की उपासना करता है उसको शनि के शुभ फल प्राप्त होते हैं.
पौराणिक कथा के अनुसार एक समय शनि देव भगवान शंकर के धाम हिमालय पहुंचे। उन्होंने अपने गुरुदेव भगवान शंकर को प्रणाम कर उनसे आग्रह किया,” हे प्रभु! मैं कल आपकी राशि में आने वाला हूं अर्थात मेरी वक्र दृष्टि आप पर पड़ने वाली है। शनिदेव की बात सुनकर भगवान शंकर हतप्रभ रह गए और बोले, “हे शनिदेव! आप कितने समय तक अपनी वक्र दृष्टि मुझ पर रखेंगे।” शनिदेव बोले, “हे नाथ! कल सवा प्रहर के लिए आप पर मेरी वक्र दृष्टि रहेगी। शनिदेव की बात सुनकर भगवन शंकर चिंतित हो गए और शनि की वक्र दृष्टि से बचने के लिए उपाय सोचने लगे।” शनि की दृष्टि से बचने हेतु अगले दिन भगवन शंकर मृत्युलोक आए। भगवान शंकर ने शनिदेव और उनकी वक्र दृष्टि से बचने के लिए एक हाथी का रूप धारण कर लिया। भगवान शंकर को हाथी के रूप में सवा प्रहर तक का समय व्यतीत करना पड़ा तथा शाम होने पर भगवान शंकर ने सोचा, अब दिन बीत चुका है और शनिदेव की दृष्टि का भी उन पर कोई असर नहीं होगा। इसके उपरांत भगवान शंकर पुनः कैलाश पर्वत लौट आए।

भगवान शंकर प्रसन्न मुद्रा में जैसे ही कैलाश पर्वत पर पहुंचे उन्होंने शनिदेव को उनका इंतजार करते पाया। भगवान शंकर को देख कर शनिदेव ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया। भगवान शंकर मुस्कराकर शनिदेव से बोले,”आपकी दृष्टि का मुझ पर कोई असर नहीं हुआ।” यह सुनकर शनि देव मुस्कराए और बोले,” मेरी दृष्टि से न तो देव बच सकते हैं और न ही दानव यहां तक कि आप भी मेरी दृष्टि से बच नहीं पाए।” यह सुनकर भगवान शंकर आश्चर्यचकित रह गए। शनिदेव ने कहा, मेरी ही दृष्टि के कारण आपको सवा प्रहर के लिए देव योनी को छोड़कर पशु योनी में जाना पड़ा इस प्रकार मेरी वक्र दृष्टि आप पर पड़ गई और आप इसके पात्र बन गए। शनि देव की न्यायप्रियता देखकर भगवान शंकर प्रसन्न हो गए और शनिदेव को हृदय से लगा लिया।
कुछ टोटको करके पाए शनिदेव की कृपा
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनिवार के दिन काले तिल, सरसों के तेल, उड़द की दाल, छाता और काले वस्त्र जैसी चीजों का दान करना अत्यंत लाभकारी होता है.
इस दिन काले कुत्ते और कौवों जैसे जीवों को रोटी या भोजन खिलाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं. ऐसे लोगों पर कभी साढ़ेसाती या ढैय्या का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता
गरीब, मजदूर और असहाय लोगों की मदद करने से भी शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही प्रत्येक शनिवार को शनिदेव की विधि विधान के साथ पूजा करिए ।
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