चंडीगढ़, 3 अप्रैल: आज का दिन विशेष है क्योंकि आज मनाया जा रहा है स्कंद षष्ठी का पावन पर्व, जो भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। भगवान कार्तिकेय, जिन्हें स्कंद या सुब्रमण्यम भी कहा जाता है, भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र हैं। वे युद्ध, शक्ति और ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं और देवताओं के सेनापति के रूप में प्रसिद्ध हैं।
स्कंद षष्ठी का महत्व:
शास्त्रों के अनुसार, खासकर कृत्यरत्नाकर, ब्रह्म पुराण और हेमाद्रि में भगवान स्कंद की पूजा के महत्व को विस्तार से बताया गया है। कहा जाता है कि शुक्ल षष्ठी के दिन दक्षिणापथ में भगवान कार्तिकेय के दर्शन मात्र से ब्रह्महत्या जैसे पापों से मुक्ति मिल जाती है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ है जो अपने जीवन में किसी कठिनाई या विवाद का सामना कर रहे हैं, क्योंकि इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा से कलह और संघर्ष से छुटकारा मिलता है।
पूजा विधि और विशेष उपाय:
इस पावन अवसर पर भगवान कार्तिकेय की पूजा बड़े श्रद्धा भाव से करें। पूजा के दौरान निम्नलिखित विधियों का पालन करें:
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गौघृत में साबुत धनिया के बीज डालकर दीपक जलाएं।
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तगर से धूप करें और भगवान कार्तिकेय को पीले कनेर के फूल चढ़ाएं।
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सिंदूर चढ़ाएं और मौसमी फल का भोग अर्पित करें।
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मिश्री का भोग लगाएं और इलायची व मिश्री से बने मिष्ठान का सेवन करें।
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इस विशेष मंत्र को 108 बार जपें: “ॐ स्कंदाय चुम्बकाय महाकायाय नमः”
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पूजा के बाद फल किसी गरीब को दान करें ताकि पुण्य का संचार हो।
संतान के स्वास्थ्य और कलह मुक्ति के लिए विशेष उपाय:
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संतान के स्वास्थ्य लाभ हेतु: भगवान कार्तिकेय को चढ़ा हुआ खिलौना किसी गरीब बच्चे को दान करें।
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कलह से मुक्ति के लिए: कार्तिकेय पर चढ़े साबुत धनिया के दानों को कर्पूर से जला दें।
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अधूरी इच्छाओं की पूर्ति के लिए: कार्तिकेय को चढ़ी पालक का गुच्छा किसी गाय को खिलाएं।
अंतिम संदेश:
आज का दिन भगवान कार्तिकेय के आशीर्वाद से हर बाधा को पार करने का एक सुनहरा अवसर है। इस पावन पर्व पर श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करें, और देखें कि कैसे आपकी अधूरी इच्छाएं पूरी होती हैं।