लोकसभा में आज राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर विशेष चर्चा हो रही है प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को दोपहर 12 बजे लोकसभा में चर्चा की शुरुआत हुई जिसके पहले वक्ता प्रधानमंत्री मोदी हैं. कांग्रेस की तरफ से मुख्य वक्ताओं में गौरव गोगोई और प्रियंका गांधी का नाम है. इस दौरान लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय दिया गया है औऱ विपक्ष को इन 10 घंटे में मात्र 2 घंटे मिले है। वही इस मौके पर देशभक्ति गीत की भूमिका और भारत की सांस्कृतिक विरासत पर चर्चा होगी। वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के मौके पर लोकसभा में दोपहर 12 बजे के बाद चर्चा शुरू हुई,
प्रधानमंत्री मोदी ने चर्चा की शुरुआत की
पीएम मोदी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा, ”हमारे लिए गर्व की बात है कि इस ऐतिहासिक अवसर के हम साक्षी बन गए हैं। एक ऐसा कालखंड जो हमारे सामने इतिहास की अनगिनत घटनाओं को अपने सामने लेकर आता है। ये एक ऐसा अध्याय है जिससे इतिहास के कई पन्ने हमारे सामने उजागर हुए हैं। मैं सभी का आभार करता हूं कि हमने इस महत्वपूर्ण अवसर पर एक सामूहिक चर्चा का रास्ता चुना है। जिस मंत्र, जिस जयघोष ने देश के आजादी के आंदोलन को ऊर्जा, प्रेरणा दी थी, त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था उस वंदे मातरम् का स्मरण करना हम सबका सौभाग्य है। हमारे लिए गर्व की बात है कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के इस ऐतिहासिक अवसर के हम साक्षी बन रहे हैं।
PM मोदी ने बताई “वंदे मातरम्” की अहमियत
यही वंदे मातरम् है जिसने 1947 में देश को आजादी दिलाई। स्वतंत्रता संग्राम का भावात्मक नेतृत्व इस वंदे मातरम् के जयघोष में था। यहां कोई पक्ष-प्रतिपक्ष नहीं है, हम सबके लिए यह रण स्वीकार करने का अवसर है, जिस वंदे मातरम् के कारण हमारे लोग आजादी का आंदोलन चला रहे थे उसी का परिणाम है कि आज हम सब यहां बैठे हैं- पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर जमकर तं/ज कसा
इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर जमकर तंज कसा उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा आज इस महत्वपूर्ण समय पर राहुल गांधी के साथ प्रियंका वाड्रा भी अपने सीट पर नही है ।
बंकिम चंद्र चटर्जी को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, वंदे मातरम् की शुरुआत बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने 1875 में की थी, यह गीत उस समय लिखा गया था जब 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेज सल्तनत बौखलाई हुई थी, भारत पर भांति-भांति के दबाव डाल रही थी, भांति-भांति के जुल्म कर रही थी। उस समय उनके राष्ट्र गीत को घर-घर तक पहुंचाने का षड्यंत्र चल रहा था, ऐसे समय में बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया और उसमें से वंदे मातरम् का जन्म हुआ
“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘जब हम वंदे मातरम कहते हैं तो यह हमें वैदिक युग की याद दिलाता है. वेदों से कहा गया है कि माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः, जिसका अर्थ है कि यह भूमि मेरी माता है और मैं पृथ्वी की संतान हूं. यह वही विचार है जो भगवान राम ने तब व्यक्त किया था जब उन्होंने वैभव को अस्वीकार करते हुए कहा था जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी वंदे मातरम् इसी महान सांस्कृतिक परंपरा की आधुनिक अभिव्यक्ति है.
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