नेशनल हेराल्ड केस: कोर्ट से सोनिया गांधी और राहुल गांधी को राहत

16 दिसंबर 2025 को राउज ऐवन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को बड़ी राहत दी है. बतादें दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय की चार्जशीट को संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। स्पेशल जज (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने कहा कि PMLA के तहत ईडी की ओर से दाखिल की गई शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि यह मामला FIR पर नहीं, बल्कि एक निजी शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है।

 

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट को संज्ञान लेने से इनकार करते हुए कहा कि ईडी चाहे तो मामले की जांच जारी रख सकती है  प्रवर्तन निदेशालय ने नेशनल हेराल्ड मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में मई 2025 में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था। कांग्रसे ने इसे बदले की राजनीति और डराने-धमकाने की कोशिश बताया था, दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया.

चार्जशीट में कई बड़ी हस्तियों के नाम शामिल

ED ने अपनी चार्जशीट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को नामजद किया था. ED की जांच पर कांग्रेस की दलील थी कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है, जबकि ED का दावा है कि यह एक गं/भीर आर्थिक अप/राध है जिसमें फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिले हैं.

ED का सोनिया-राहुल पर बड़े घोटाले का आरोप

ED का आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने साजिश के तहत एसोसिएटेड जर्नल्स लि. (AJL) की 2,000 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर कब्जे के लिए उसका अधिग्रहण प्राइवेट कंपनी ‘यंग इंडियन’ के जरिए सिर्फ 50 लाख रुपए में किया था. इस कंपनी के 76% शेयर सोनिया और राहुल के पास हैं. इस मामले में ‘अपराध से अर्जित आय’ 988 करोड़ रुपए मानी गई. साथ ही संबद्ध संपत्तियों का बाजार मूल्य 5,000 करोड़ रुपए बताया गया है.

नेशनल हेराल्ड केस क्या है?

अब जानते है यह केस क्या है दरअसल जिस नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है, वो नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़ा है. अब नेशनल हेराल्ड केस भारत के एक प्रमुख राजनीतिक और कानूनी विवाद की जड़ बन गया है. यह 2012 में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत से शुरू हुआ. यह एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) नामक कंपनी से जुड़ा है, जो नेशनल हेराल्ड अखबार (जवाहरलाल नेहरू द्वारा 1938 में स्थापित) को चलाती थी AJL पर कर्ज का बोझ था, फिर कांग्रेस पार्टी ने इसे 90.25 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त कर्ज दिया.

 

बाद में यह कर्ज यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (YIL) नामक कंपनी को मात्र 50 लाख रुपये में हस्तांतरित कर दिया गया, जिसके माध्यम से AJL की अरबों रुपये की संपत्तियां (दिल्ली, मुंबई आदि में) YIL के नियंत्रण में चली गईं. ED का आरोप है कि यह एक साजिश थी, जिसमें सरकारी संपत्ति को निजी लाभ के लिए हड़पा गया, धोखाधड़ी, विश्वासघात और मनी लॉन्ड्रिंग हुई.