सोमवार का दिन शंकर भगवान को समर्पित होता है. आज के दिन भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. कुछ लोग आज के दिन व्रत भी रखते हैं ताकि शिव की विशेष कृपा प्राप्त की जा सके. बाबा भोलेनाथ के आशिर्वाद के लिए आप भी सोमवार का व्रत कर रहे हैं, तो शिव व्रत कथा को पढ़कर या सुनकर इस उपवास को पूरा करें. नारद पुराण के अनुसार सोमवार व्रत में व्यक्ति को प्रातः स्नान करके शिव जी को जल और बेल पत्र चढ़ाना चाहिए तथा शिव-गौरी की पूजा करनी चाहिए.
शिव पूजन के बाद सोमवार व्रत कथा सुननी चाहिए. इसके बाद केवल एक समय ही भोजन करना चाहिए. साधारण रूप से सोमवार का व्रत दिन के तीसरे तक होता है. तक रखा जाता है. सोमवार व्रत तीन प्रकार का होता है प्रति सोमवार व्रत, सौम्य प्रदोष व्रत और सोलह सोमवार का व्रत. इन सभी व्रतों के लिए एक ही विधि होती है
सोमवार व्रत के नियम
सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठें और दिन की शुरुआत देवी-देवता के ध्यान से करें। इसके बाद स्नान करने के साफ वस्त्र धारण करें। सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। इस दौरान सूर्य देव के मंत्रों का जप करना शुभ माना जाता है। इसके बाद मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें। चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और मां पार्वती की प्रतिमा को विराजमान करें। दूध, घी, शक्कर, गुड़, दही और गंगाजल समेत आदि चीजों से रुद्राभिषेक करें।
महादेव को बेलपत्र, चंदन, अक्षत, फल अर्पित करें और मां पार्वती को सोलह श्रृंगार की चीजें चढ़ाएं। दीपक जलाकर आरती करें और व्रत का संकल्प लें। भगवान शिव के मंत्रों का जप करें। अब महादेव को फल, मिठाई और फल आदि चीजों का भोग लगाएं।
सोमवार व्रत की कहानी
सोमवार व्रत की कहानी एक धनवान साहूकार की है जिसे संतान नहीं थी जिसके वजह से बहुत दुख में रहता था एक ब्राह्मण ने उसको पुत्र प्राप्ति के लिए सोमवार की व्रत रखने की सलाह दी जिससे सुनकर साहूकार बहुत प्रसन्न हुआ साहूकार ने पूरे विधि विधान के साथ सोमवार का व्रत रखा जिसकी तपस्या देख कर और उसकी भक्ति देखकर पार्वती जी के ह्दय में साहूकार के प्रति दया भावना आई और उन्होंने भगवान शिव से आग्रह किया तब पार्वती जी के कहने पर शिवजी ने साहूकार को वरदान दिया, पर बताया कि पुत्र 12 साल ही जीएगा यह सुनकर साहूकार ने दुःख में भी भगवान शंकर का व्रत जारी रखा साहूकार की पत्नी को पुत्र हुआ और अंत में, शिवजी की कृपा से साहूकार के पुत्र के प्राण बच गए और परिवार सुखी रहने लगा, जो भगवान शंकर के सच्ची श्रद्धा और धैर्य का महत्व बताती है।
देवों के देव महादेव बहुत ही भोले हैं
माना जाता है देवों के देव महादेव बहुत ही भोले हैं, इसलिए उनका एक नाम भोलेनाथ भी है। पौराणिक मान्यतानुसार, भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए किसी भी तरह के खास विशेष पूजन की आवश्यकता नहीं होती। क्योंकि कहा जाता है कि वह तो भोले हैं और भक्त की मन से की गई क्षणिक मात्र की भक्ति से ही वह प्रसन्न हो जाते हैं। अगर आप भी शिव की भक्ति और कृपा पाने के लिए सावन के सोमवार का व्रत करते है तो आप की भी मनोकामना भगवान शंकर जरुर पूरी करेगे।
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