चंडीगढ़, 19 जून: 21 जून को पूरी दुनिया जब योग चटाई पर बैठती है, तो वह केवल शरीर को तंदुरुस्त करने का एक माध्यम नहीं होता। यह दिन एक आध्यात्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है—एक ऐसा संवाद जो आत्मा और ब्रह्मांड के बीच फिर से जुड़ने का प्रयास करता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य नहीं, बल्कि जीवन शैली में संतुलन और मानसिक शांति का प्रसार है।
मोदी जी की पहल से वैश्विक स्तर पर योग की स्वीकार्यता
भारत में योग हजारों वर्षों से जीवन पद्धति का हिस्सा रहा है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है।
27 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से एक ऐतिहासिक भाषण में 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा था:
“योग भारत की प्राचीन परंपरा का अमूल्य उपहार है। यह मन और शरीर, विचार और कर्म, संयम और पूर्ति, मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य की भावना है।“
यह प्रस्ताव इतना सशक्त और व्यापक था कि सिर्फ 90 दिनों में संयुक्त राष्ट्र महासभा में 193 में से 177 देशों ने इसका समर्थन किया, जो UNGA इतिहास की सबसे तेजी से पारित होने वाली घोषणाओं में एक है।
क्यों चुना गया 21 जून ही?
21 जून को चुनने के पीछे गहरा आध्यात्मिक और प्राकृतिक महत्व है:
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यह वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है (गर्मियों की संक्रांति), जो प्रकृति के ऊर्जा चक्र में बदलाव का समय होता है।
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योग, जो जीवन में दीर्घायु और ऊर्जा का संचार करता है, इस दिन के महत्व से पूरी तरह मेल खाता है।
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यह दिन योग के ‘अंतर’ को ‘बाह्य’ से जोड़ने का प्रतीक माना गया है।
2015: पहली बार मना योग दिवस, और बना इतिहास
21 जून 2015, को पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया।
🔹 इस ऐतिहासिक आयोजन में प्रधानमंत्री मोदी ने खुद नई दिल्ली के राजपथ पर 35,985 लोगों के साथ योग किया।
🔹 84 देशों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया और यह कार्यक्रम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो गया।
योग: बीमारी से मुक्ति नहीं, स्वास्थ्य की निरंतरता का नाम है
योग को केवल उपचार के लिए नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन को बनाए रखने के एक सतत अभ्यास के रूप में देखा जाना चाहिए।
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यह हर उम्र के लोगों के लिए लाभदायक है—चाहे बच्चा हो, युवा हो या बुजुर्ग।
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मानसिक तनाव, नींद की कमी, मोटापा, डायबिटीज और यहां तक कि हृदय रोगों में भी योग ने कारगर समाधान प्रदान किया है।
योग सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, सामाजिक उत्थान का भी माध्यम
प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा यह कहा है कि:
“योग एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है, लेकिन इसकी शुरुआत हर व्यक्ति के भीतर से होनी चाहिए।“
इसलिए:
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अपने परिवार और दोस्तों को योग के लिए प्रेरित करें।
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स्कूलों, कार्यालयों और संस्थानों में नियमित योग कार्यक्रमों को बढ़ावा दें।
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ऑनलाइन माध्यम से उन लोगों तक पहुंचें, जो शुरुआत करना चाहते हैं लेकिन जानकारी या मार्गदर्शन की कमी से झिझकते हैं।
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