मोदी-पुतिन के बीच हुए कई ऐतिहासिक डील,जानिएं देश को कितना होगा फायदा

राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ ऐतिहासिक फैसले लिए जिसमें कई बड़े डील शामिल है। वही पुतिन के दूसरे दौरे के दिन शुक्रवार को पूरा दिन जिस तरह लगातार समझौतों, प्रेस ब्रीफिंग, बिजनेस ऐलान और नए रोडमैप से भरा दिखा, उसने साफ कर दिया कि भारत-रूस रिश्ते एक बड़े मोड़ पर हैं. नौकरियों से लेकर व्यापार, ऊर्जा से लेकर टेक्नोलॉजी, कनेक्टिविटी से लेकर कूटनीति हर फ्रंट पर दोनों देशों ने ऐसे फैसले किए जिन्हें असल मायने में ‘डील ऑफ द डिकेड’ कहा जा सकता है.

 

सबसे बड़ा बदलाव तब दिखा जब मैनपावर मोबिलिटी एग्रीमेंट पर दस्तखत हुए. मतलब भारतीय कामगारों के लिए रूस में नौकरी और स्किल-बेस्ड अवसरों के नए दरवाजे. इसके साथ ही मोदी सरकार ने रूसी नागरिकों के लिए 30 दिनों का फ्री वीजा घोषित कर दिया. वहीं दोनों देशों ने तय किया कि व्यापार को बेहद आसान बनाने के लिए नेशनल करेंसी में पेमेंट को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. इन फैसलों ने यह संदेश साफ कर दिया कि आने वाले दशक में भारत-रूस साझेदारी और भी असरदार होने जा रही है दोनों नेताओं ने 2030 का बड़ा आर्थिक रोडमैप भी फाइनल किया. इसमें व्यापार, निवेश, लॉजिस्टिक्स, नई तकनीक, ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे सेक्टरों में विस्तार की योजना शामिल है

भारतीय कामगारों के लिए मैनपावर मोबिलिटी एग्रीमेंट.

रूसियों के लिए 30 दिन का फ्री वीजा.

स्वास्थ्य क्षेत्र में 2 अहम समझौते हुए : मेडिकल को-ऑपरेशन, ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी साझेदारी.

कृषि-फर्टिलाइजर सेक्टर में संयुक्त यूरिया उत्पादन.

ऊर्जा क्षेत्र में अनइंटरप्टेड फ्यूल सप्लाई का आश्वासन.

राष्ट्रीय करेंसी में दोनों देशों के बीच ट्रेड तेज.

यूरोपीय-यूरेशियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर प्रगति.

शिप बिल्डिंग में सहयोग-‘मेक इन इंडिया’ को बड़ा बूस्ट.

प्रधानमंत्री  मोदी ने कहा कि दुनिया जितनी अनिश्चितताओं से गुजर रही है, उतनी ही मजबूती से भारत-रूस रिश्ते ‘ध्रुव तारे की तरह स्थिर’ बने हुए हैं.

कैसे बदलेगा भारतीयों का भविष्य?

मैनपावर मोबिलिटी एग्रीमेंट इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण रहा. इसके तहत भारतीय स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड कामगारों के लिए रूस में काम के अवसर तेज़ी से बढ़ेंगे. यह एग्रीमेंट कंपनियों के बीच नियमों को आसान करेगा और भारत को एक विश्वसनीय वर्कफोर्स सोर्स के रूप में स्थापित करेगा.

इंडिया-रूस बिजनेस फोरम: नए अवसरों का धमाका

मोदी और पुतिन जल्द ही इंडिया-रूस बिजनेस फोरम में शामिल होंगे, जहां दोनों देशों के उद्योगों को जोड़ने पर फोकस रहेगा. फर्टिलाइजर, कृषि, शिप बिल्डिंग, ऊर्जा और टेक सेक्टर पर खास ज़ोर होगा. इससे भारतीय MSME, टेक स्टार्टअप और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को सीधे रूसी बाजार से जुड़ने का मौका मिलेगा.

ऊर्जा सुरक्षा: रूस का बड़ा भरोसा

राष्ट्रपति पुतिन ने साफ कहा कि ‘रूस भारत को ईंधन की निर्बाध आपूर्ति के लिए पूरी तरह तैयार है और इस दिशा में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है.’ मतलब, भारत की एनर्जी जरूरतों को पूरा करने में रूस की प्रतिबद्धता और मजबूत हुई है. न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट्स में भी सहयोग बढ़ेगा.

भारत-रूस समझौते से क्या बदल जाएगा?

 भारत और रूस के बीच हुए नए समझौते सिर्फ औपचारिक सहयोग नहीं, बल्कि आने वाले दशक की आर्थिक और रणनीतिक दिशा तय करने वाले कदम हैं. आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 के तहत दोनों देशों ने मिलकर 100 बिलियन डॉलर तक व्यापार और निवेश पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है. इससे जहां भारत का एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ेगा, वहीं रूस को एशिया में एक बड़ा और स्थिर बाजार मिलेगा.

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ा असर

स्वास्थ्य क्षेत्र में हुआ सहयोग भी ऐतिहासिक माना जा रहा है. हेल्थकेयर, मेडिकल एजुकेशन और साइंस पार्टनरशिप के तहत भारत को एडवांस मेडिकल टेक्नोलॉजी, नए रिसर्च मॉडल और ट्रेनिंग का फायदा मिलेगा. जबकि रूस को भारत की विश्वसनीय और सस्ती जेनरिक दवाइयों तक आसान पहुंच मिलेगी. यह हेल्थ सेक्टर में दोनों देशों को एक-दूसरे के लिए जरूरी और पूरक बनाता है.

समुद्री व्यापार पर भी बड़ा फैसला

शिपिंग और पोर्ट सेक्टर MoU के जरिए जहाजरानी, पोर्ट डेवलपमेंट और पोलर वाटर्स के जरिए नए ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे. इससे भारत का समुद्री व्यापार अधिक तेज, सस्ता और प्रभावी होगा, जबकि रूस को लॉजिस्टिक्स और शिपिंग के जरिए कमाई का एक नया, स्थाई और दीर्घकालिक स्रोत मिलेगा.