जितिया व्रत पूजा की जाने विधि

आश्विन माह के, शुक्ल पक्ष में  दशहरा, एकादशी और शरद पूर्णिमा समेत कई प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। जितिया व्रत हर साल आश्विन मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर होता है इस बार यह व्रत 14 सितंबर को है और पारण 15 सितंबर को होगा। इसी माह के दौरान जितिया व्रत भी मनाया जाता है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। यह व्रत विवाहित महिलाएं पुत्र की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए के लिए रखती हैं। संतान प्राप्ति के लिए जितिया का व्रत रखा जाता है। इस व्रत की शुरुआत नहाय खाय से होती है। वहीं, समापन पारण से होता है। जितिया व्रत हिंदू धर्म का एक बेहद पवित्र व्रत है, आइए, नहाय खाय से लेकर पारण की सही तिथि जानते हैं  जिसमें शुद्ध और सात्विक भोजन करना जरूरी होता है. कहा जाता है कि इस दिन भोजन में की गई एक भी गलती पूरे व्रत के प्रभाव को कम कर सकती है. इसलिए नहाए-खाए के नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है. व्रत करने वाली महिलाओं को एक दिन पहले से तामसिक भोजन छोड़ देना चाहिए। ऐसे में नहाय खाय के दिन लहसुन, प्याज आदि चीजों का प्रयोग खाने में नहीं करना चाहिए।

जितिया व्रत में नहाय खाय के नियम
नहाय खाय के दिन महिलाएं नदी या तालाब में स्नान करती हैं और फिर, झिमनी के पत्तों पर सरसों के तेल की खली को रखकर जीमूतवाहन भगवान की पूजा करती हैं। संभव न होने पर आप घर में भी स्नान कर सकती हैं। इसके साथ ही झिमनी के पत्ते न उपलब्ध हो पाने पर व्रती महिलाएं केले के पत्तों का प्रयोग भी कर सकती हैं सप्तमी तिथि यानी आज दिन के समय कई स्थानों पर मडुआ की रोटी खाने की परंम्परा होती है,  सप्तमी तिथि के दिन ज्यादा हैवी और ऑयली खाना खाने से बचना चाहिए।

जितिया व्रत 14 सितंबर को पड़ रही
इस बार अष्टमी तिथि 14 सितंबर को पड़ रही है। इस दिन सूर्योदय से पहले यानी ब्रह्म मुहूर्त में जितिया ओठगन रहेगा। इस दौरान व्रती महिलाएं चूड़ा, दही, पानी, नारियल पानी आदि ग्रहण कर सकती है। भोजन करने के बाद अपने शरीर को दरवाजे से टिकाकर पानी ग्रहण किया जाता है। माना जाता है कि इससे भाइयों की आयु भी लंबी होती है।

जितिया व्रत और पारण के नियम
ओठगन के बाद महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। इस दौरान अन्न का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया जाता है और न ही दातुन किया जाता है। इसके बाद, नवमी तिथि जो इस बार 15 सितंबर, रविवार को पड़ रही है, पूजा करने के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण करना चाहिए। साथ ही, इस दिन आम दतुअन से दातुन करने का विधान होता है। इस व्रत में साफ सफाई का ध्यान रखना जरुरी होता है,रिपोर्ट न्यूज पीडिया 24