Mandi Landslide: पल भर में उजड़ गया एक परिवार, मलबे में दबी ज़िंदगी की आखिरी चीख!

चंडीगढ़, 2 जुलाई: हिमाचल प्रदेश की वादियाँ आमतौर पर अपनी सुंदरता और शांति के लिए जानी जाती हैं, लेकिन मंडी जिले के सराज क्षेत्र में एक काली रात ने प्रकृति का ऐसा क्रूर रूप दिखाया, जिसने एक पूरे गांव को मातम में डुबो दिया। बाड़ा पंचायत के घ्याहण गांव में 1 जुलाई की रात क़रीब 1 बजे भयंकर भूस्खलन हुआ, जिसने गिरधारी लाल के परिवार पर कहर बनकर हमला किया। यह हादसा इतना तेज और अचानक था कि दस कमरों का मजबूत मकान पलक झपकते ही मलबे में तब्दील हो गया।

इस दर्दनाक घटना में 86 वर्षीय मंघरी देवी और 33 वर्षीय विधि चंद की मौके पर ही मौत हो गई। यह केवल एक हादसा नहीं था, बल्कि एक बेटे का अपनी दादी को बचाने के प्रयास में बलिदान देने की दिल दहला देने वाली गाथा थी।

मौ*त से पहले बचाने की आखिरी कोशिश

गिरधारी लाल अपने तीन बेटों — विधि चंद, कमल और तुलसी — के साथ इस घर में रहते थे। जब रात को भूस्खलन शुरू हुआ, तो सब कुछ हिलने लगा। विधि चंद को जैसे ही खतरे का अहसास हुआ, उसने बिना देर किए अपने घर के बाकी सदस्यों को बाहर निकाला। लेकिन जब वह अपनी बुजुर्ग दादी मंघरी देवी को सुरक्षित लाने के लिए फिर से अंदर गया, तो उसी पल जमीन दरकी और मलबे का पहाड़ उन पर टूट पड़ा।

विधि चंद और मंघरी देवी, दोनों की ज़िंदगी वहीं खत्म हो गई। विधि चंद की ये कोशिश हमेशा के लिए गांववालों के दिलों में एक मिसाल के तौर पर जिंदा रहेगी — एक ऐसा युवा, जिसने अपनों की खातिर अपनी जान कुर्बान कर दी।

घायलों का इलाज, गांव में मातम

इस हादसे में गिरधारी लाल, उनकी बहू सरला देवी, और दो पोते संजय कुमार और दिव्यांशु भारद्वाज भी घायल हो गए। सभी को रात में ही राहत और बचाव दल द्वारा अस्पताल पहुंचाया गया।

गांव की पंचायत प्रधान जिमा देवी ने बताया कि जैसे ही लोगों को हादसे का पता चला, पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। हर तरफ चीखें, रोने की आवाज़ें और मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिशें चल रही थीं। तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों शवों को बाहर निकाला जा सका, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

एक परिवार टूटा, दो मासूमों से छिन गई पिता की छांव

इस हादसे में जहां एक मां ने अपना बेटा और बेटा अपनी मां को खो दिया, वहीं विधि चंद के दो मासूम बेटे अपने पिता की छाया से वंचित हो गए। यह एक ऐसा नुकसान है, जिसकी भरपाई शायद कभी संभव नहीं। गिरधारी लाल की आंखों में केवल आंसू नहीं, बल्कि असहायता और पीड़ा की पूरी कहानी झलक रही थी — कैसे एक झटके में उनका संसार उजड़ गया।

पूरा गांव शोक में डूबा, नुकसान सिर्फ एक घर का नहीं

घ्याहण गांव में केवल गिरधारी लाल का परिवार ही इस आपदा से नहीं टूटा, गांव के अन्य हिस्सों में भी नुकसान हुआ है। भूस्खलन के कारण कई रास्ते बंद हो गए हैं, कुछ घरों में दरारें आ गईं और लोगों के दिलों में डर का स्थायी साया बस गया है।

हर घर में इस त्रासदी की चर्चा है, और हर आंख नम है। गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि उन्होंने ऐसा कहर पहले कभी नहीं देखा। यह प्राकृतिक आपदा अपने पीछे एक ऐसा घाव छोड़ गई है, जो शायद वक्त भी नहीं भर पाएगा।