सोमवार को भगवान शिव का दिन माना जाता है. ‘सोम’ शब्द का अर्थ चंद्रमा होता है. चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक की शोभा बढ़ाता है. हिंदू धर्म में सोमवार का दिन विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित माना गया है. भगवान शिव को नीलकंठ भी कहा जाता है। इस दिन शिव भक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाकर जलाभिषेक करते हैं और भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए विविध पूजन विधियां अपनाते हैं. माना जाता है कि सोमवार को सच्चे मन से शिव पूजा करने से मनचाहा वरदान मिलता है, विशेष रूप से विवाह, संतान और आर्थिक सुख से जुड़ी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.
सोमवार को शिव पूजा क्यों है खास?
सोमवार को शिव का प्रिय दिन माना गया है. यही दिन सोम यानी चंद्रमा से भी जुड़ा है, जिसे शिव ने अपने सिर पर धारण किया है.
यह दिन शांत चित्त, संयम और आध्यात्मिक ऊर्जा के विकास के लिए उत्तम होता है. सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.
कर्ज और आर्थिक संकट से मुक्ति मिलती है. मन और मस्तिष्क शांत रहता है, चिंता और क्रोध पर नियंत्रण आता है.
सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से संतान सुख, नौकरी व विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं.
शिव मंत्र जाप करें
ॐ नमः शिवाय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
ॐ केशवाय नमः
ॐ नारायणाय नमः
ॐ माधवाय नमः
ॐ हृषीकेशाय नम: मंत्र बोलना चाहिए।

सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा कैसे करें?
सोमवार को जल्दी उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहनें सोमवार को सफेद वस्त्र पहनना शुभ माना जाता हैं. सोमवार को शिवालय में जाकर शिवलिंग को जल जरुर चढाना चाहिए.
फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें. बेलपत्र, धतूरा, आक, भांग, सफेद फूल, भगवान शिव को विशेष पसंद है इसलिए ये चढाएं, चावल और भस्म भगवान शिव को जरुर चढ़ाएं. उन पर पंचमेवा, फल, मिठाई अर्पण करें.
इसके बाद दीपक में घी या तिल का तेल रखें. रुद्राक्ष की माला से ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें. शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करें और शिवजी की आरती करें. शिवजी को मिश्री या गुड़ का भोग लगाएं. इसी विधि के साथ प्रदोष काल में भी भगवान शिव की पूजा करें.
सोमवार के दिन शिव पूजा में क्या न करें?
सोमवार को इन चीजों को चढाने की विशेष मनाही होती है-
हल्दी, तुलसी पत्र शिवलिंग पर अर्पित ना करें.
केतकी का फूल और नारियल पानी शिवलिंग पर अर्पित ना करें.
शिवजी के साथ शिव परिवार की भी आराधना करें, माता पार्वती, कार्तिकेय,
भगवान गणेश को कभी भी बासी फूल या दूषित जल शिव अभिषेक में प्रयोग न करें. अति शोरगुल और मन में अशांति लेकर पूजा न करें.
शिव पूजा का समय
भगवान शिव की पूजा के लिए सुबह 4 बजे से लेकर 7 बजे तक का मुहूर्त उत्तम रहता है. इसके बाद प्रदोष काल में भगवान शिव का पूजन करें. भगवान शिव की पूजा करने का सबसे उत्तम समय प्रदोष काल माना जाता है. प्रदोष काल का समय सूर्यास्त से पहले के 1.5 घंटे और बाद के 1.5 घंटे का योग होता है, आमतौर पर शाम 5:30 से 7:30 तक.
एक कथा के अनुसार, चंद्र देव को जब दक्ष प्रजापति ने शाप दिया कि वे क्षय रोग से पीड़ित होकर धीरे-धीरे क्षीण हो जाएंगे. तब चंद्रदेव ने भगवान शिव की आराधना की.
सोमवार का व्रत करके शिव की कृपा प्राप्त की और पुनः तेजस्वी हो गए. तभी से सोमवार का दिन शिव और चंद्र देव दोनों की उपासना के लिए खास माना जाता है. सोमवार के दिन लोग व्रत रखते हैं और भगवान शिव व चंद्र देव की उपासना करते हैं.
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