‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ की वापसी से टीवी इंडस्ट्री में हलचल, क्या ‘अनुपमा’ की TRP को लगेगा झटका?

चंडीगढ़, 9 जुलाई: टीवी इतिहास के सबसे चर्चित और प्रतिष्ठित शोज में से एक, ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ अब दोबारा टेलीविजन पर दस्तक देने जा रहा है। एकता कपूर का यह शो 25 साल बाद नए रूप में लौटने के लिए तैयार है। जैसे ही इस रिबूट वर्जन का प्रोमो सामने आया, टीवी इंडस्ट्री में खलबली मच गई है। दर्शकों में उत्साह है, चैनल्स में प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है और सभी की नजर अब उस शो पर टिक गई है, जो पिछले चार सालों से TRP की रेस में टॉप पर बना हुआ है — ‘अनुपमा’

क्या ‘अनुपमा’ को मिलेगी सीधी टक्कर?

स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाला ‘अनुपमा’ इस समय सबसे ज्यादा देखे जाने वाला शो है। परिवार, संबंधों, नारी सशक्तिकरण और संघर्ष की कहानी ने इसे हर घर में पहचान दिलाई है। रुपाली गांगुली द्वारा निभाया गया अनुपमा का किरदार एक आइकन बन चुका है। लेकिन अब जब ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ की वापसी हो रही है, तो सवाल उठना लाजमी है — क्या यह शो अनुपमा की TRP पर असर डालेगा?

इसमें कोई दोराय नहीं कि ‘क्योंकि…’ अपने समय का क्रांतिकारी पारिवारिक शो था, जिसने 2000 के दशक में टीवी की दिशा ही बदल दी थी। तुलसी, मिहिर और विरानी परिवार जैसे नाम घर-घर में प्रसिद्ध हो गए थे। अब अगर इस शो की वापसी हो रही है, तो स्वाभाविक है कि पुराने दर्शक भावुक होकर इसे देखने लगेंगे। लेकिन आज की नई पीढ़ी क्या इसे उतनी ही रुचि से देखेगी? यही असली कसौटी होगी।

क्या ‘अनुपमा’ की पकड़ कमजोर होगी?

अनुपमा पिछले चार सालों से लगातार दर्शकों का प्यार बटोर रहा है। इसकी कहानी आज के सामाजिक संदर्भों को छूती है — जैसे महिलाओं की आज़ादी, तलाक, दूसरा विवाह, आत्मसम्मान आदि। दूसरी ओर, ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ की पिछली छवि एक पारंपरिक सास-बहू ड्रामा की रही है, जिसे अब नए रंग-रूप और कहानी के साथ पेश किया जा रहा है।

TRP की रेस में असर तो ज़रूर होगा, लेकिन कितना, यह दो बातों पर निर्भर करेगा:

  1. नई कहानी कितनी आधुनिक और कनेक्टेड होगी

  2. अनुपमा कितना लगातार दर्शकों से जुड़ा रह पाती है

शो की सफलता किन बातों पर निर्भर करती है?

टीवी पर कोई भी शो तभी लंबी रेस में टिकता है, जब उसमें चार मजबूत तत्व हों:

  • कहानी में नवीनता और गहराई

  • कलाकारों की दमदार परफॉर्मेंस

  • दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव

  • प्रस्तुति का अंदाज और निर्देशन

‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ को आज के समय के हिसाब से खुद को ढालना होगा। अगर यह शो पुरानी शैली में लौटा, तो केवल नॉस्टैल्जिया पर ज्यादा दिन टिकना मुश्किल होगा। वहीं, अगर इसमें सामाजिक यथार्थ और आज की पीढ़ी की सोच झलकी, तो यह अनुपमा को कड़ी टक्कर दे सकता है।

टीवी की दो महारानियाँ – अब होगी सीधी भिड़ंत?

2020 के बाद से अनुपमा दर्शकों के दिल में राज कर रही है। दूसरी ओर, ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ 2000 से 2008 तक का वो शो है, जिसने टेलीविज़न की दिशा और दशा तय की थी। अब ये दोनों शोज एक ही चैनल (Star Plus) पर मौजूद होंगे। यानी मुकाबला सिर्फ दर्शकों का नहीं, बल्कि टाइम स्लॉट, प्रमोशन और इमोशनल कनेक्शन का भी होगा।