जाने नवरात्री के नवमें स्वरुप मां सिद्धिदात्री की पूजन विधि

आज शारदीय नवरात्रि का नौवां दिन है, जिसे नवमी या महानवमी भी कहा जाता है. . नवरात्रि के 9वें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है. सिद्धिदात्री माता, देवी दुर्गा का नौवां स्वरूप हैं, जिन्हें सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी कहा गया है. इस तिथि का नवरात्रि में विशेष महत्व माना जाता है, नवरात्र के आखिरी दिन मां दुर्गा की नौवीं और अलौकिक शक्ति मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है सिद्धियों को देने वाली मां सिद्धिदात्री। कहते हैं- इनकी पूजा से व्यक्ति को हर प्रकार की सिद्धि प्राप्त होती है।

 

मार्केण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व, कुल आठ सिद्धियां हैं, जो कि मां सिद्धिदात्री की पूजा से आसानी से प्राप्त की जा सकती हैं। देव पुराण के अनुसार भगवान शिव ने भी मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही सिद्धियों को प्राप्त किया था और इन्हीं की कृपा से भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर कहलाये। लिहाजा विशिष्ट सिद्धियों की प्राप्ति के लिये नवरात्रि के नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा अवश्य ही करनी चाहिए। क्योंकि इस दिन लोग कन्या पूजन का आयोजन करते हैं और कन्या पूजन के बिना नवरात्रि का व्रत अधूरा माना जाता है 1 अक्टूबर 2025 को नवमी तिथि शाम 7 बजकर 2 मिनट तक रहेगी। नवरात्रि के नवमी पर सिद्धिदात्री माता की कथा का पाठ जरूर करना चाहिए.

 

 

मां सिद्धिदात्री की पूजन विधि

शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की साधना-आराधना करने के लिए साधक को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए. इसके बाद मां सिद्धिदात्री की साधना और व्रत का संकल्प लेना चाहिए. फिर पूजा घर में मां सिद्धिदात्री का चित्र या मूर्ति रखकर उस पर पवित्र जल छिड़कना चाहिए. इसके बाद मां दुर्गा के नौवें स्वरूप की पुष्प, रोली, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, फल, मिष्ठान, नारियल, चुनरी आदि अर्पित करने के बाद मां सिद्धिदात्री के मंत्र का जप करते हुए उनका ध्यान करना चाहिए.

 

नवरात्रि नवमी की कथा

धार्मिक मान्यता है कि असुरों के अत्याचारों से परेशान होकर जब सभी देवता भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे, तब देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति की उत्पत्ति हुई, जिसे माता सिद्धिदात्री के रूप में जाना गया. पौराणिक कथा के अनुसार माता सिद्धिदात्री की कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और वे ‘अर्धनारीश्वर’ कहलाए. मां सिद्धिदात्री को सिद्धियों की दाता कहा जाता है. माता सिद्धिदात्री अपने भक्तों को ‘अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व’ जैसी आठ प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं. नवरात्रि के नौवें दिन (महानवमी) पर माता सिद्धिदात्री की पूजा के साथ नवरात्रि व्रत का पूर्ण फल मिलता है.

 

मां सिद्धिदात्री का भोग 

 

नवमी तिथि को कांसे के पात्र में नारियल पानी और तांबे के पात्र में शहद डालकर देवी मां को चढ़ाना चाहिए। कालिका पुराण में आज कद्दू की ब/लि का विधान है। ईख, यानि गन्ने का रस भी देवी मां को चढ़ाया जा सकता है।

 

मां सिद्धिदात्री की पूजा का मुहूर्त

सुबह पूजा: 6:00 AM – 10:00 AM

मध्याह्न पूजा: 12:00 PM – 3:00 PM

शाम आरती: 6:30 PM – 8:00 PM