नवरात्र आने में कुछ ही दिन बचें हैं, हर साल आने वाला शारदीय नवरात्रि का पर्व, मां दुर्गा की भक्ति और शक्ति का प्रतीक होता है. नवरात्र के नौ दिनों में माता के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. ताकि हमेशा मां दुर्गा की कृपा भक्तों पर बनी रहे, बतादें सनातन धर्म में नवरात्र का विशेष महत्व होता है. आश्विन माह की नवरात्र को शारदीय नवरात्र के नाम से जाना जाता है. नवरात्र मे कलश स्थापना का विशेष महत्तव है कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त का खास ख्याल रखा जाता है जिससे पूजा की शुरुआत अच्छी मानी जाती है,ज्योतिष एवं अनुसंधान केंद्र संचालक पवन पंडित ने बताया कि, “नवरात्र पर्व का माता के भक्तों को बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि इन दिनों मां की खास विधि से आराधना करने से माता की कृपा बनी रहती है.
शारदीय नवरात्र की शुरुआत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है. इस बार प्रतिपदा 22 सितंबर को सुबह 1:30 से शुरू होकर 23 सितंबर को 2:55 तक रहेगी. इसलिए नवरात्र की शुरुआत 22 सितंबर से हो रही है, नवरात्र के दिन सबसे पहले कलश स्थापना की जाती है, जो सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.. वैसे तो पहला नवरात्र घट स्थापना का पूरा दिन माना जाता है, लेकिन फिर भी कुछ लोग हैं शुभ मुहूर्त में घट स्थापना करते हैं. इस बार घट स्थापना करने का शुभ मुहूर्त का समय सुबह 6:09 से शुरू होकर 8:06 तक रहेगा. जबकि दूसरा शुभ अभिजीत मुहूर्त 11:39 से 12:38 तक रहेगा. इस शुभ मुहूर्त के दौरान घट स्थापना करना काफी अच्छा माना जाता है.”
कलश को देवताओं का प्रतीक माना जाता है
कलश को देवताओं का प्रतीक मानते हुए उसमें सभी शक्तियों का आह्वान करें. भगवान वरुण, देवी पृथ्वी, देवगण, वेद, दिक्पाल – सभी को कलश में आमंत्रित किया जाता है. यह प्रार्थना की जाती है कि नवरात्रि के नौ दिन कोई विघ्न न आए और पूजा सही ढंग से पूरी हो.
घटस्थापना की संपूर्ण विधि
कलश स्थापना के बाद से ही मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का क्रम शुरू होता है.नवरात्र के पहले दिन सुबह उठकर स्नान करें.घटस्थापना से पहले घर और पूजा स्थल की सफाई करें. सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें.अब पूजा स्थल पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें, एक छोटी सी चौकी या पाटा पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर, उस पर मां दुर्गा की प्रतिमा को विराजमान करें. फिर उनको एक लाल रंग की चुनरी पहनाएं, इसके बाद मिट्टी का छोटा सा चबूतरा बनाएं फिर एक कलश लें उसपर स्वास्तिक बनाएँ और सिंदूर का तिलक लगाएं, उसके बाद कलश पर मौली का धागा बांधे और उसमें सात अनाज और जौ डालें. फिर उसमें जल भर लें. कलश में चंदन, फूल, पान, सिक्का,लौंग, हरी इलायची, बताशा और सुपारी डालें. फिर एक नारियल ले अब इस नारियल पर लाल चुनरी लपेटकर रक्षा सूत्र बाधें फिर इस पर लाल सिंदूर का टीका लगाएं, फिर आम के पेड़ के 5 या 7 पत्ते कलश के पानी के अंदर डुबोकर रख दें. उसके ऊपर नारियल रख दें. इसके बाद कलश स्थापित कर दें. जो मिट्टी का चबूतरा बनाया है, उसे पर जौ डालें और उसमें पानी डालें, ताकि वह अंकुरित हो जाए. इसके बाद मां दुर्गा का आवाहन करके उनको वहां विराजमान कराएं. हर दिन मां की सुबह शाम आरती करें. मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना करें, कलश स्थापना के बाद से ही मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का क्रम शुरू होता है. हर दिन अलग-अलग रूपों का पूजन किया जाता है,नवरात्रि के न सिर्फ पहले दिन बल्कि पूरे 9 दिनों में मां भगवती के सामने दीपक जलाकर, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें. रोज सुबह और शाम मां की आरती और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें.रिपोर्ट न्यूूज पीडिया24
Top Tags